एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि भारत अपने इमरेंजी स्टॉक से करीब 50 लाख बैरल तेल बाजार में जारी करेगा। बता दें कि अमेरिका, जापान और दूसरे इकोनॉमी में क्रूड की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए इस तरह के कदम उठाए जाते हैं। भारत सरकार ने भी इन्ही देशों से अनुसरण करते हुए यह निर्णय लिया है।
बता दें कि भारत भूमिगत टैंकों में करीब 3.8 करोड़ बैरल तेल पूर्वी और पश्चिमी तटों पर स्थिति स्थानों पर संग्रहित करके रखता है। इसमें से करीब 50 लाख मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारा जाएगा। इस सरकारी अधिकारी ने नाम की गोपनीयता बनाए रखने के शर्त पर यह भी बताया कि अगले 7 से 10 दिनों के बीच ऐसा किया जा सकता है। यह स्टॉक मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL)और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL)को बेचा जाएगा। ये दोनों रिफाइनरी पाइपलाइन के जरिए स्ट्रैटजिक रिजर्व से जुड़ी हुई है।
इस सरकारी अधिकारी ने यह भी बताया है कि बाद में जरुरत पड़ने पर सरकार और रिजर्व रिलीज कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर औपचारिक एलान जल्द ही करेगी।
कच्चे तेल की चाल पर नजर डालें तो इसमें दबाव देखने को मिल रहा है। ब्रेंट का भाव फिर 80 डॉलर के नीचे फिसला है। कच्चा तेल 6 हफ्ते के निचले स्तरों पर पहुंचा है। US राष्ट्रपति के बयान से पहले कच्चे तेल में दबाव बना है। बाइडेन SPR से क्रूड जारी करने का ऐलान कर सकते हैं। वहीं जापान भी है SPR से क्रूड जारी करने का ऐलान कर सकता है। हालांकि भारत ने इसकी मात्रा और समय का ऐलान नहीं किया है। इस बीच डॉलर इंडेक्स 16 महीने की ऊंचाई पर पहुंचा है। कई देशों में कोरोना के मामले बढ़े, मांग घटी है।
इधर US पर OPEC+ भड़का है। ओपेक का कहना है कि मौजूदा हालात में खरीदारों का फैसला गलत है। दिसंबर की बैठक में उत्पादन बढ़ाने पर दोबारा विचार करेंगे। खरीदार देशों के फैसले से ज्यादा हालात नहीं सुधरेगे।