Oil Prices : क्रूड का प्राइस गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया है। और अब यह पिछले दो साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा था कि अमेरिका अपना क्रूड रिजर्व रिलीज करेगा। ऐसे बहुत कम मौके होते हैं जब कच्चे तेल की महंगाई से निपटने के लिए अमेरिका अपना क्रूड रिजर्व खोले।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फ्यूचर्स (West Texas Intermediate futures) शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 0.8% गिरा। इस हफ्ते अब तक यह करीब 13% कमजोर हो चुका है।
रोज 10 लाख बैरल तेल रिलीज करेगा अमेरिका
अमेरिका की छह महीनों के लिए प्रति दिन 10 लाख बैरल तेल रिलीज करने की योजना है। हालांकि, एनालिस्ट्स ने आगाह किया है कि किसी भी तरह की राहत छोटी अवधि के लिए होगी। ओपेक प्लस अलायंस की बैठक से ठीक पहले गुरुवार की सुबह ऐसी खबरें आ रही थीं कि तेल उत्पादक देशों का संगठन मई में सप्लाई में कुछ बढ़ोतरी कर सकता है।
यूक्रेन युद्ध से कमोडिटी मार्केट में भूचाल
यूक्रेन में रूस के जंग छेड़ने से ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में भूचाल की स्थिति है और खाद्य पदार्थों से लेकर फ्यूल की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे महामारी के बाद इकोनॉमिक ग्रोथ को गति देने की कोशिशों में लगी सरकारों की चुनौतियां खासी बढ़ गई हैं। तेल के बाजार में उथल-पुथल मची हुई है और मार्च में कीमतों में खासी मजबूती दर्ज की गई।
बाइडेन ने पुतिन को बताया जिम्मेदार
राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने इसके लिए अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और रूस के यूक्रेन पर हमले को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के लिए अनिच्छुक नजर आने पर अमेरिकी तेल कंपनियों की भी आलोचना की है। पहले से ऊंची चल रही पेट्रोल की कीमतें अब युद्ध के चलते खासी बढ़ गई हैं।
छह महीनों में दो बार खोला रिजर्व
अमेरिका पिछले छह महीनों में दो बार अपने रिजर्व खोल चुका है, लेकिन कीमतें कम करने के लिए यह पर्याप्त नहीं था। इस बार लगभग 18 करोड़ बैरल तेल जारी किया जा सकता है और बाइडेन ने कहा कि वह अपने सहयोगियों से अपने रिजर्व से 3 करोड़ और 5 करोड़ बैरल ज्यादा जारी किए जाने की उम्मीद करते हैं। अमेरिका में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आई हैं।
गोल्डमैन सैक्स ग्रुप ने दूसरी छमाही में ब्रेंट के लिए अपने अनुमान को 10 डॉलर घटाकर 125 डॉलर कर दिया है। बैंक ने एक नोट में कहा कि इस फैसले से “तेल की स्ट्रक्चरल कमी” का हल नहीं निकलेगा।