जुलाई में बढ़ी पेट्रोल की मांग, बारिश की वजह से डीजल की डिमांड में आई गिरावट

जुलाई की पहली छमाही में डीजल की खपत में 15 फीसदी की भारी गिरावट आई थी लेकिन दूसरे पखवाड़े में इसमें तेजी आई। डीजल की बिक्री आमतौर पर मानसून के महीनों में गिर जाती है क्योंकि बारिश के कारण कृषि क्षेत्र में मांग कम हो जाती है जो सिंचाई, कटाई और परिवहन के लिए ईंधन का उपयोग करता है। इसके अलावा, बारिश में गाड़ियां भी कम चलती हैं

अपडेटेड Aug 01, 2023 पर 2:31 PM
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पिछले महीने यानी जुलाई में देश भर में पेट्रोल (Petrol) की खपत में इजाफा देखने को मिला है

पिछले महीने यानी जुलाई में देश भर में पेट्रोल (Petrol) की खपत में इजाफा देखने को मिला है। हालांकि देश के कुछ हिस्सों में मानसून, बारिश और बाढ़ क वजह से डीजल की मांग में गिरावट देखने को मिली है। 1 अगस्त यानी मंगलवार को जारी किए गए आकंड़ों में यह बात सामने आई है। देश में डीजल सबसे ज्यादा खरत होने वाले फ्यूल की कटेगरी में आता है। इसकी खपत जुलाई में एक साल पहले की तुलना में 4.3 प्रतिशत गिरकर 6.15 मिलियन टन पर पहुंच गई।

जुलाई में डीजल की खपत में आई गिरावट

जुलाई की पहली छमाही में डीजल की खपत में 15 फीसदी की भारी गिरावट आई थी लेकिन दूसरे पखवाड़े में इसमें तेजी आई। डीजल की बिक्री आमतौर पर मानसून के महीनों में गिर जाती है क्योंकि बारिश के कारण कृषि क्षेत्र में मांग कम हो जाती है जो सिंचाई, कटाई और परिवहन के लिए ईंधन का उपयोग करता है। इसके अलावा, बारिश में गाड़ियां भी कम चलती हैं। अप्रैल और मई में डीजल की खपत क्रमशः 6.7 प्रतिशत और 9.3 प्रतिशत बढ़ गई थी, क्योंकि कृषि मांग बढ़ी थी और गर्मी से बचने के लिए कारों ने एयर कंडीशनिंग का सहारा लिया था। मानसून आने के बाद जून के दूसरे पखवाड़े में इसमें कमी आनी शुरू हो गई।


महीने दर महीने की बिक्री में भी आई गिरावट

जून में 7.13 मिलियन टन डीजल की खपत की तुलना में महीने-दर-महीने बिक्री में 13.7 प्रतिशत की गिरावट आईहालांकि जुलाई में पेट्रोल की बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3.8 प्रतिशत बढ़कर 2.76 मिलियन टन हो गई। जुलाई के पहले पखवाड़े में खपत में 10.5 फीसदी की गिरावट आई थी लेकिन बाद के आधे हिस्से में इसमें तेजी आई। आंकड़ों से पता चलता है कि बिक्री महीने-दर-महीने 4.6 प्रतिशत कम रही। भारत में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों एक साल से अधिक समय से तेल की मांग का समर्थन करने के लिए विस्तार क्षेत्र में हैं। इसके चलते मार्च की दूसरी छमाही से पेट्रोल और डीजल की बिक्री बढ़ गई थी। तेल कार्टेल ओपेक के मंथली तेल बुलेटिन के अनुसार, इस साल के लिए, भारत की तेल मांग साल-दर-साल 0.2 मिलियन बैरल प्रति दिन होने का अनुमान है।

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साल 2022 में कितनी रही थी पेट्रोल की खपत

जुलाई 2022 के दौरान पेट्रोल की खपत कोविड वाले साल जुलाई 2021 की तुलना में 16.6 प्रतिशत अधिक और कोविड से पहले जुलाई 2019 की तुलना में 20.8 प्रतिशत अधिक थी। डीजल की खपत जुलाई 2021 की तुलना में 12.8 प्रतिशत अधिक थी, लेकिन जुलाई 2019 की तुलना में लगभग स्थिर रही। इसके अलवा एयरपोर्ट पर पैसेंजर्स की तादाद बढ़ने के साथ, जेट फ्यूल (ATF) की मांग जुलाई के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10.3 प्रतिशत बढ़कर 603,500 टन हो गई। यह जुलाई 2021 की तुलना में दोगुने से अधिक था, लेकिन प्री-कोविड जुलाई 2019 की तुलना में 2.9 प्रतिशत कम था।

LPG सिलेंडर की बिक्री भी हुई कम

जून 2023 में 594,100 टन की तुलना में महीने-दर-महीने जेट ईंधन की बिक्री 1.6 प्रतिशत बढ़ी। उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान देश की तेल मांग को मजबूत औद्योगिक गतिविधि से समर्थन मिला है। जुलाई में रसोई गैस एलपीजी की बिक्री सालाना आधार पर 1.7 फीसदी घटकर 2.46 मिलियन टन रही। एलपीजी की खपत जुलाई 2021 की तुलना में 4 प्रतिशत अधिक और प्री-कोविड जुलाई 2019 की तुलना में 11.7 प्रतिशत अधिक थी। आंकड़ों से पता चलता है कि महीने-दर-महीने, जून के दौरान 2.28 मिलियन टन एलपीजी खपत की तुलना में एलपीजी की मांग 8 प्रतिशत अधिक थी। .

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