Petrol Diesel Price: उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत 5 राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के बाद आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर बड़ा झटका लग सकता है। विधान सभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आना हैं, इसके बाद पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं। इसकी वजह ये है कि कच्चे तेल के दाम 8 साल के हाई लेवल पर जा पहुंचे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे पहले 2014 में कच्चे तेल के दाम 95 डॉलर के पार गए थे।
जानकारों का मानना है कि चुनाव के बाद तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में 5-6 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी कर सकती है। मौजूदा समय में पेट्रोल-डीजल के दाम न बढ़ने से तेल कंपनियां लंबी चपत लग रही है। लिहाजा मार्जिन बनाए रखने के लिए तेल कंपनियां 5-6 रुपये प्रति लीटर तेल के दाम बढ़ा सकते हैं।
दरअसल, 01 दिसंबर 2021 को कच्चे तेल के दाम 69 डॉलर प्रति बैरल थे, जो अब 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गए हैं। यानी यानी ढाई महीने के भीतर कच्चे तेल के दामों में 37 फीसदी की तेजी आ चुकी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक जल्द ही ये 100 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार में भी दिखाई देता है।
ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल अगर एक डॉलर प्रति बैरल महंगा होता है तो घरेलू बाजार में दाम 45-47 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ जाते हैं। लेकिन विदेशी बाजारों में कच्चे तेल में तेजी के बावजूद घरेलू बाजार में दिवाली के बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं। बता दें कि सरकार भले ही पेट्रोल-डीजल की कीमत तय करने में अपनी भूमिका से इनकार करती हो, लेकिन बीते सालों में देखा गया है कि चुनाव के दौरान सरकार जनता को खुश करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाती है। पिछले सालों का ट्रेंड बता रहा है कि चुनावी मौसम में जनता को पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों से राहत मिली है।