Petrol and Diesel Prices: क्रूड ऑयल 93 डॉलर के पार, आप पर पड़ेगा क्या असर?

बीते नवंबर में सरकार ने लोगों को महंगे पेट्रोल और डीजल से राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कमी की थी। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रती लीटर की कमी की गई थी

अपडेटेड Feb 07, 2022 पर 11:49 AM
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देश का पेट्रोल बिल बढ़ने का असर रुपया पर भी पड़ता है। डॉलर की ज्यादा मांग से रुपये पर दबाव बढ़ जाता है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। सोमवार को यह 74.73 के स्तर पर था। पिछले साल 7 फरवरी को यह 72.78 के स्तर पर था। इस तरह एक साल में यह 2 रुपये से ज्यादा कमजोर हो चुका है

क्रूड ऑयल (Crude Oil) की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 93 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। यह पिछले सात साल में क्रूड की सबसे ऊंची कीमत है। डिमांड के मुकाबले कम ग्लोबल सप्लाई, रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिका में खराब मौसम के चलते क्रूड की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मजबूत डिमांड को देखते हुए जल्द क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। सिर्फ इस साल इसका भाव करीब 20 फीसदी तक चढ़ चुका है। सवाल है कि क्रूड की कीमतों में अगर वृद्धि जारी रहती है तो आप पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए इसका जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

महंगे होंगे पेट्रोल और डीजल

महंगे क्रूड के चलते इंडिया में पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) के भाव बढ़ सकते हैं। इससे फ्यूल पर आपका खर्च बढ़ेगा। हालांकि, पिछले 69 दिन से सरकार ने पेट्रोल और डीजल के भाव में बदलाव नहीं किया है। लेकिन, आने वाले दिनों में वह कीमतें बढ़ा सकती है। माना जा रहा है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के चलते पेट्रोलियम कंपनियां अभी भाव नहीं बढ़ा रही हैं। 10 मार्च को इन राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजें आ जाएंगे। इसके बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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महंगाई में हो सकती है वृद्धि

महंगे पेट्रोल और डीजल से आपका फ्यूल खर्च (Fuel Expenditure) तो बढ़ेगा ही, इससे महंगाई में भी वृद्धि होगी। खासकर डीजल का इस्तेमाल माल ढुलाई के लिए होता है। इस वजह से डीजल महंगा होने पर ट्रांसपोर्ट कंपनियां माल ढुलाई किराया बढ़ा देती हैं। इससे फल-सब्जी सहित ज्यादातर चीजों की कीमतें बढ़ जाती है। पहले से ही देश में महंगाई बढ़ रही है। दिसंबर में रिटेल इन्फ्लेशन बढ़कर 5.59 फीसदी पर पहुंच गया। यह पांच महीने में सबसे ज्यादा है।

डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव

भारत पेट्रोलिय की अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी आयात करता है। पेट्रोलियम के आयात पर भारी रकम खर्च होती है। सरकार को पेट्रोलियम की कीमत ज्यादातर डॉलर में चुकानी पड़ती है। इसलिए देश का पेट्रोल बिल बढ़ने का असर रुपया पर भी पड़ता है। डॉलर की ज्यादा मांग से रुपये पर दबाव बढ़ जाता है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। सोमवार को यह 74.73 के स्तर पर था। पिछले साल 7 फरवरी को यह 72.78 के स्तर पर था। इस तरह एक साल में यह 2 रुपये से ज्यादा कमजोर हो चुका है।

नवंबर में सरकार ने घटाए थे टैक्स

देश के ज्यादातर शहरों में पेट्रोल और डीजल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है। सोमवार को मुंबई में पेट्रोल का भाव 109.98 रुपये प्रति लीटर था। वहां डीजल का भाव 94.14 रुपये प्रति लीटर था। दिल्ली में पेट्रोल 95.41 रुपये और डीजल 86.67 रुपये प्रति लीटर था। बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश सहित ज्यादातर राज्यों में पेट्रोल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर है।

बीते नवंबर में सरकार ने लोगों को महंगे पेट्रोल और डीजल से राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कमी की थी। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रती लीटर की कमी की गई थी। उसका बाद से दिल्ली सहित कई राज्यों ने अपने-अपने यहां वैट भी घटाया था। तब से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के रिटेल प्राइस नहीं बढ़ाए हैं। अगर सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स नहीं घटाया होता तो कुछ राज्यों में पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई होती।

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