WTI Crude 90 डॉलर से नीचे आया, चीन के कमजोर आर्थिक आंकड़ों का असर

चीन के आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) के मंदी (recession) में जाने को लेकर आशंका बढ़ गई है। ऐसा होने पर कच्चे तेल की डिमांड में कमी आएगी

अपडेटेड Aug 16, 2022 पर 10:55 AM
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मंगलवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड 81 सेंट की कमजोरी के साथ 88.6 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में मंगलवार को गिरावट आई। चीन की अर्थव्यवस्था (China Economy) से जुड़े कमजोर डेटा का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा। चीन दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। चीन के आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) के मंदी (recession) में जाने को लेकर आशंका बढ़ गई है। ऐसा होने पर कच्चे तेल की डिमांड में कमी आएगी।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 90 सेंट या करीब 1 फीसदी गिरकर 94.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। मंगलवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड 81 सेंट की कमजोरी के साथ 88.6 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। सोमवार को क्रूड फ्यूचर्स में करीब 3 फीसदी की गिरावट आई थी।

चीन के केंद्रीय बैंक ने डिमांग बढ़ाने के लिए लेंडिंग रेट घटा दिया है। चीन की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े काफी कमजोर आए हैं। जुलाई में चीन की अर्थव्यवस्था में उम्मीद से ज्यादा सुस्ती आई है। फैक्ट्री और रिटेल एक्टिविटी में गिरावट आई है। इसकी वजह चीन की प्रॉपर्टी क्राइसिस और कोविड-19 को लेकर चीन की सख्त नीति रही है।


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चीन का फ्यूल प्रोडक्ट एक्सपोर्ट अगस्त में बढ़ने की उम्मीद है। यह इस साल अब तक के उच्च स्तर पर पहुंच सकता है। इसकी वजह यह है कि चीन ने जून और जुलाई में ज्यादा कोटा जारी किए हैं। हालांकि, कोरोना को लेकर जो पाबंदियां लगाई गई हैं, उसका असर शिपमेंट पर पड़ने के आसार हैं। एनालिस्ट्स और ट्रेडर्स का कहना है कि 2022 में शिपमेंट के 7 साल के निचले स्तर पर आ जाने की उम्मीद है।

अमेरिका में सितंबर में शेल ऑयल बेसिन में कुल उत्पादन बढ़कर 90.49 लाख बैरल रोजाना पहुंच जाएगा। यह मार्च 2020 के बाद से सबसे ज्यादा होगा। यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) ने यह जानकारी दी है।

ऑयल मार्केट से जुड़े लोगों को अमेरिका में क्रूड ऑयल के स्टॉक के डेटा आने का इंतजार है। ऑयल और गैसोलीन का स्टॉक पिछले हफ्ते घटने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, डिस्टिलेट इनवेंट्रीज बढ़ने की उम्मीद है। रायटर्स के एक पोल से ये संकेत मिले हैं।

इनवेस्टर्स की नजरें 2015 की ईरान न्यूक्लियर डील को लेकर बातचीत फिर से शुरू होने पर भी लगी हैं। अगर ईरान और अमेरिका यूरोपीय संघ के एक ऑफर को मान लेते हैं तो ऑयल की सप्लाई बढ़ सकती है। इस डील के होने से ईरान के तेल के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हट जाएगा।

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