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जुलाई से घट सकता है रसोई का बजट; अरहर, चना और उड़द दालों की कीमतों में आ सकती है नरमी: सरकार

सरकार की ओर से कहा गया है कि दालों की कीमतों को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और खुदरा कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सभी जरूरी उपाय करेगी। सब्जियों के मामले में भी मानसून की बारिश से खुदरा कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। आलू की मांग बढ़ गई है क्योंकि गर्मी ने हरी सब्जियों की फसल को प्रभावित किया है

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jun 15, 2024 पर 8:48 AM
जुलाई से घट सकता है रसोई का बजट; अरहर, चना और उड़द दालों की कीमतों में आ सकती है नरमी: सरकार
भारत ने पिछले वित्त वर्ष में लगभग 8 लाख टन तुअर और 6 लाख टन उड़द का आयात किया।

Pulses Price: अच्छे मानसून और आयात बढ़ने की उम्मीदों के चलते अगले महीने से अरहर, चना और उड़द दालों की कीमतों में नरमी आने की संभावना है। यह बात केंद्रीय उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कही। साथ ही यह भी कहा कि दालों की कीमतों को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अगले महीने से इन तीनों दालों का आयात भी बढ़ेगा, जिससे घरेलू आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी।

खरे ने कहा, ‘‘पिछले 6 महीनों में अरहर, चना और उड़द दालों की कीमतें स्थिर रही हैं, लेकिन उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। मूंग और मसूर दालों की कीमत की स्थिति संतोषजनक है।’’ सब्जियों के मामले में भी खरे ने कहा कि मानसून की बारिश से खुदरा कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। आलू की मांग बढ़ गई है क्योंकि गर्मी ने हरी सब्जियों की फसल को प्रभावित किया है। सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद शुरू कर दी है और 35,000 टन प्याज की खरीद पहले ही हो चुकी है।

दालों की औसत कीमतें

13 जून को चना दाल का औसत खुदरा मूल्य 87.74 रुपये प्रति किलोग्राम, तुअर (अरहर) दाल का 160.75 रुपये प्रति किलोग्राम, उड़द दाल का 126.67 रुपये प्रति किलोग्राम, मूंग दाल का 118.9 रुपये प्रति किलोग्राम और मसूर दाल का 94.34 रुपये प्रति किलोग्राम था। उपभोक्ता मामलों का विभाग देश के 550 प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों से खाद्य उत्पादों के खुदरा मूल्य इकट्ठे करता है। खरे ने कहा कि मौसम विभाग ने सामान्य मानसून बारिश का अनुमान लगाया है, जिससे दालों की खेती के रकबे में काफी सुधार होगा। मार्केट सेंटिमेंट्स में भी सुधार होगा।

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