Rubber Prices: इंटरनेशनल मार्केट में रबर की कीमतों में गिरावट आई। डॉलर 180 सेंट/किलो के नीचे भाव फिसले है। दिसंबर 2025 के बाद सबसे नीचे भाव गिरा। अच्छे मौसम के अनुमान ने रबर पर दबाव बनाया है। थाईलैंड, इंडोनेशिया बड़े उत्पादक देश हैं। थाईलैंड में मॉनसून में गिरावट की उम्मीद है। चीन में मांग बढ़ने की उम्मीद से तेजी आई।
इंटरनेशनल मार्केट में रबर की चाल पर नजर डालें तो 1 हफ्ते में 2 फीसदी की गिरावट के साथ कामकाज कर रहा। 1 महीने में 3 फीसदी की तेजी देखने को मिली। जनवरी 2026 में अब तक 0.50 फीसदी की बढ़त देखने को मिली।
रबर की कीमतों में आगे तेजी की संभावनाएं
MD एक्यूमेन कैपिटल के अक्षय अग्रवाल ने कहा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर रबर पर पड़ रहा है। EU डिफॉरेस्टेशन नियमों का असर भी रबर की कीमतों पर पड़ रहा है, यह नियम 1 जनवरी 2026 से आना था। जिसे कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया है। इसके कारण इंटरनेशल मार्केट में कीमतों में दबाव देखने को मिल रहा है।
इस बीच भारत में रबर का उत्पादन कम है। लेकिन भारतीय बाजार में प्रोडक्शन कम होने के चलते यहां से कीमतों में उछाल आ सकता है। देश में 7.70 लाख टन औसतन उत्पादन होता है। हालांकि इन दिनों रबर का उत्पादन कम हो जाता है। मांग से ज्यादा सप्लाई में कमी आई है।
इस साल देश में रबर का 4-5 फीसदी कम होने की उम्मीद है। आगे रबर की कीमतों में तेजी की संभावनाएं नजर आ रही है।