Gold Silver price today :पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बावजूद नहीं बढ़ रही सोने की कीमतें, जानिए वजह

Gold Silver price today : मज़बूत डॉलर और बढ़ती महंगाई के चलते US फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बावजूद सोने की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हो रही है

अपडेटेड Mar 14, 2026 पर 9:36 AM
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ग्लोबल मंदी और भू-राजनीतिक तनाव में और बढ़ोतरी के कारण,2026 में सोने की कीमतें मौजूदा स्तरों से लगभग 15-20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं

प्रथमेश माल्या

Gold Silver price today : अमेरिका-इज़राइल- ईरान के बीच संघर्ष 28 फरवरी,2026 को शुरू हुआ। इस लड़ाई में ईरानी लीडरशिप और बुनियादी ढांचे पर हमले शामिल किए जा रहे है। 13 मार्च तक यानी लगभग दो हफ़्ते बाद सोने की कीमतें 5,277 डॉलर प्रति औंस के उच्चतम स्तर से लेकर 5,054 डॉलर प्रति औंस के न्यूनतम स्तर के दायरे में रहीं हैं। 13 मार्च तक MCX पर,सोने की कीमतें 1,69,880 रुपये (यानी 27 फरवरी का उच्चतम स्तर) से लेकर 1,59,350 रुपये प्रति 10 ग्राम की रेंज में रहीं है।

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अमेरिका और इज़राइल,ईरान द्वारा परमाणु हथियार बानने को प्रयास को लेकर खुश नहीं हैं। इसलिए,उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों के चलते ईरान के सर्वोच्च नेता,अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई,जो 1989 से देश का नेतृत्व कर रहे थे। अब यह युद्ध और भी ज़्यादा बढ़ गया है,जिससे कमोडिटीज़ के लिए एक 'जियोपोलिटिकल रिस्क प्रीमियम' (geopolitical risk premium) पैदा हो गया है, और 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' (Strait of Hormuz) से तेल और गैस के सप्लाई में बाधा उत्पन्न हो गई है। यह एक ऐसा प्रमुख जलमार्ग है जिससे होकर दुनिया भर के 20 प्रतिशत तेल की खेप गुज़रती है।

बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रही हैं सोने की कीमतें ?

पश्चिम एशिया में हो रहे युद्ध का दायरा बढ़कर सऊदी अरब,लेबनान,इराक और UAE जैसे पड़ोसी देशों तक पहुंच गया है। आमतौर पर ऐसी घटनाओं से पैदा होने वाली अफरा-तफरी और अनिश्चितता के कारण सोने की कीमतें बढ़नी चाहिए थीं। इसके विपरीत युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में कंसोलीडेशन देखने को मिल रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना दायरे में कारोबार कर रहा है।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के बंद होने के कारण,तेल की कीमतों में रिस्क प्रीमियम काफ़ी बढ़ गया है। WTI क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक पहुंच गया है,जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है। इसके अलावा,दुनिया भर के निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प "डॉलर" की ओर रुख कर रहे हैं,जो हाल के हफ़्तों में मज़बूत हुआ है।

दूसरी ओर मज़बूत डॉलर और बढ़ती महंगाई का माहौल,युद्ध से पैदा हुए भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद,सोने की कीमतों को बढ़ने से रोक रहा है। चूंकि ऊंची ब्याज दरें और मज़बूत डॉलर सोने की कीमतों के विपरीत दिशा में चलते हैं,इसलिए सोने की तेज़ी धीमी पड़ गई है और कीमतें छोटे दायरे में कंसोलीडेट हो रही हैं।

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आगे कैसी रह सकती है सोने की चाल?

सोना 5,165 डॉलर प्रति औंस के आस-पास ट्रेड कर रहा है। पिछले एक साल में इसकी कीमत 80 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ी है। अकेले 2025 में ही यह 50 से ज़्यादा बार अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा है। यह कीमती धातु लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव,सेंट्रल बैंकों की मांग,फेडरल रिज़र्व की नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता और आर्थिक सुधार की संभावनाओं के बीच एक खींचतान में फंसी हुई है। मौजूदा माहौल में तीन संभावित स्थितियां बन सकती हैं।

तेजी की स्थिति : ग्लोबल मंदी और भू-राजनीतिक तनाव में और बढ़ोतरी के कारण,2026 में सोने की कीमतें मौजूदा स्तरों से लगभग 15-20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।

मध्यम तेजी की स्थिति : अमेरिका की आर्थिक वृद्धि में सुस्ती और फेड द्वारा दरों में मामूली कटौती से सोने की कीमतों में 5-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।

मंदी की स्थिति : अमेरिका की मज़बूत ग्रोथ, महंगाई में बढ़त और ऊंची ब्याज दरों के कारण सोने की कीमतों में 5-20 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। (फिलहाल,ऐसी स्थिति की संभावना कम ही लगती है।)

 

प्रथमेश माल्या

 

 

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