Sugar News: एथेनॉल प्रोडक्शन पर सरकार ने हटाई पाबंदी, इंडस्ट्रीज एक्सपर्ट्स से जानें इससे कितना होगा फायदा

अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि फसल ज्यादा होने से डायवर्जन भी ज्यादा होगा। इस साल चीनी का डायवर्जन 32 लाख टन हुआ है। अगले साल 45- 50 लाख टन का डायवर्जन संभव है। इस साल क्रशिंग सीजन थोड़ा लंबा होने की संभावना है। उन्होने आगे कहा कि गन्ने की पैदावार बढ़ती है तो इसका फायदा इंडस्ट्रीज को होगा।

अपडेटेड Sep 02, 2025 पर 3:05 PM
अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि फसल ज्यादा होने से डायवर्जन भी ज्यादा होगा। इस साल चीनी का डायवर्जन 32 लाख टन हुआ है।

Sugar News: इस साल गन्ने का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है। इसे देखते हुए सरकार ने चीनी मिलों को एथेनॉल बनाने की पूरी छूट दे दी है। इससे कंपनियों ज्यादा से ज्यादा चीनी को एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट कर सकेंगे।

बता दें कि मौजूदा साल में गन्ने की सप्लाई कम होने के कारण एथेनॉल प्रोडक्शन पर पाबंदी थी। अब 1 नवंबर से शुरू हो रहे नए एथेनॉल सप्लाई ईयर में कोई क्वांटिटेटिव रेस्ट्रिक्शन नहीं रहेगा। फूड और पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन डिपार्टमेंट समय-समय पर एथेनॉल डायवर्जन की समीक्षा करेगा ताकि चीनी की घरेलू उपलब्धता प्रभावित न हो। पिछले दो साल अच्छी बारिश और गन्ने की खेती का रकबा बढ़ने से सप्लाई मज़बूत मानी जा रही है।

सरकार एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को प्रोत्साहित कर रही है। सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर बेच रही हैं। इस एथेनॉल सप्लाई वर्ष में सरकारी तेल कंपनियों ने 31 जुलाई 2025 तक के आंकड़ों के हिसाब से औसतन 19.05% एथेनॉल मिलाने का लेवल हासिल किया है। बता दें कि पहले सरकार की योजना 20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल का लक्ष्य वर्ष 2030 तक हासिल करने का था लेकिन फिर इसे एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 कर दिया था।


सरकार के इस फैसले पर बात करते हुए Shree Renuka Sugars के एग्जिक्युटिव चेयरमैन अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि फसल ज्यादा होने से डायवर्जन भी ज्यादा होगा। इस साल चीनी का डायवर्जन 32 लाख टन हुआ है। अगले साल 45- 50 लाख टन का डायवर्जन संभव है। इस साल क्रशिंग सीजन थोड़ा लंबा होने की संभावना है। उन्होने आगे कहा कि गन्ने की पैदावार बढ़ती है तो इसका फायदा इंडस्ट्रीज को होगा।

सरकारी फैसले का फायदा इंडस्ट्रीज को मिलेगा। बतौर इंडस्ट्रीज हम चाहते है कि एथेनॉल का प्राइस रीविजन हो, क्योंकि वह बेहद जरुरी भी है। क्योंकि एमआरपी में बढ़त होती है लेकिन प्राइस रीविजन नहीं होता। एथेनॉल का प्राइस रिविजन इंडस्ट्रीज के पक्ष में ज्यादा जरुरी हो जाता है। आज कोई औचित्य नहीं है कि आप ₹72 की रेंज में मक्के का एथेनॉल ले और केन जूस एथेनॉल केवल ₹65 की रेंज में लें और बी हेवी का 60 ₹1 की रेंज में लें।अगर डायवर्जन ज्यादा होता भी है तो चीनी की कीमतों में घरेलू फ्रंट पर ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

कल ही सुप्रीम कोर्ट ने 20% Ethanol Blended Petrol (EBP-20) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि अप्रैल 2023 से पहले बने वाहन 20% एथेनॉल ब्लेंड वाले पेट्रोल के लिए कम्पैटिबल नहीं हैं। CJI बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह नीति पहले ही गहराई से जांची जा चुकी है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने दलील दी कि यह नीति किसानों के हित और विदेशी मुद्रा की बचत के लिए जरूरी है।

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