अल नीनो (El Niño ) ने एशिया में कुछ परेशानियां पैदा करनी शुरू कर दीं है। एशियाई चावल बाजार इस मौसमी घटना से परेशानियों का सामना कर रहा है। दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक भारत में निर्यात प्रतिबंधों से दुनिया का चावल बाजार पहले ही परेशानी में है। ऐसे में अल नीनो की वजह से सूखे मौसम के कारण और अधिक मुश्किलें पैदा होने का खतरा है। चावल के उत्पादन में किसी भी तरह की कमी से इसकी ग्लोबल सप्लाई में कमी आने का खतरा है। इससे चावल की कीमतों में नए सिरे से तेजी आ सकती है। बता दें कि हाल दिनों में चावल की कीमतें लगभग 15 वर्षों के हाई से नीचे आती दिखीं थीं।
इंडोनेशिया ने उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई
पूरे एशिया में तमाम देश अल नीनो प्रभाव के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। चावल के एक बड़े आयातक इंडोनेशिया ने उत्पादन में मामूली गिरावट की आशंका जताई है, जबकि वियतनाम ने किसानों से पानी की कमी से बचने के लिए अपनी अगली फसल समय से पहले बोने को कहा है। चावल की महंगाई बढ़ने के कारण फिलीपींस मौसम से निपटने के लिए उत्पादकों को सहायता भी दे रहा है।
जानकारों का कहना है कि जलवायु संबंधी इस घटना से एशिया और अफ्रीका से लेकर दक्षिण अमेरिका तक के क्षेत्रों में बाढ़ और सूख जैसी स्थियों के कारण फसलें सूख सकती हैं, बिजली ग्रिडों पर दबाव बढ़ सकता है, मछली पकड़ने पर असर पड़ सकता है और खदानों तक पहुंच बंद हो सकती है।
यूनिवर्सिटी मलाया (Universiti Malaya) के इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर मुहम्मद शाकिरिन मिस्पान (Muhamad Shakirin Mispan)का कहना है कि "कई फसलें, खासतौर से पानी की सप्लाई पर ज्यादा निर्भर करने वाली फसलें, अल नीनो से बुरी तरह प्रभावित होंगी।" उन्होंने कहा चावल के बडे़ उत्पादक देशों में उत्पादन घटने से दुनिया में चावल की आपूर्ति घटेगी। इससे न केवल दक्षिण पूर्व एशिया प्रभावित होगा, बल्कि दुनिया भर में इसका प्रभाव पड़ेगा।
भारत द्वारा चावल के शिपमेंट पर प्रतिबंध से परेशानी बढ़ी
जुलाई के अंत में भारत द्वारा चावल के शिपमेंट पर प्रतिबंध बढ़ाए जाने के बाद चावल बाजार में कई हफ्तों तक उथल-पुथल देखने को मिली थी। भारत के इस कदम ने एशिया से लेकर अफ्रीका तक की सरकारों को चिंतित कर दिया है। तमाम देशों में जमाखोरी को लेकर चेतावनी जारी की गई है। फिलीपींस और इंडोनेशिया में तो महंगाई बढ़ गई है।
अल नीनो आम तौर पर एशिया के कुछ हिस्सों में गर्म और शुष्क मौसम लाता है। ये इस इलाके में सूखे और जंगल की आग का कारण बन सकता है। इंडोनेशिया इस साल और अगले साल अधिक अनाज आयात करने की योजना बना रहा है, और उसका कहना है कि 2023 में इसका उत्पादन 1.2 मिलियन टन तक गिर सकता है। बिना छिलके वाले चावल का उत्पादन 54.5 मिलियन टन होने की उम्मीद है जो 2022 से थोड़ा कम है।
ऑस्ट्रेलिया को उम्मीद है कि अल नीनो कम से कम फरवरी के अंत तक बना रहेगा। यहां पशुपालकों से अपील की जा रही है कि वे बूचड़खानों के लिए गायों की बिक्री बढ़ाकर सूखे से निपटने की तैयारी में मदद करें।