Tur Price: भारतीय बाजार में इन दिनों अरहर के दाम (Tur Price) के दाम फिर से बढ़ने लगे हैं। अप्रैल महीने में दाम में कुछ नरमी आई थी। लेकिन इस महीने में दाम बढ़ने से भारत सरकार इसके दाम में कमी लाने की तैयारी शुरू कर दी है। भारत सरकार ने अरहर आयात करने के मकसद से म्यांमार (Myanmar) के साथ बातचीत कर रही है। भारत के दलहन आयात सेक्टर में अरहर और उड़द (Tur and urad) की 70 फीसदी हिस्सेदारी है। म्यांमार इन दोनों दालों का एक उत्पादक है। यहां से इन दोनों दालों का भारी मात्रा में आयात किया जाता है।
ऐसे में डोमेस्टिक प्रोडक्शन म्यांमार में इन दालों की जमाखोरी कर रहे हैं। इस बीच, दालों के दाम में कमी लाने के लिए सरकार म्यांमार से बातचीत कर रही है। एक बड़े अधिकारी ने बताया कि घरेलू बाजार में दाल की कमी के कारण कीमतों में उछाल आया है। यह तेजी अक्टूबर में नया सीजन शुरू होने तक जारी रह सकती है।
कीमतों में आ सकती है गिरावट
उपभोक्ता मामलों के विभाग (department of consumer affairs) ने विदेश मंत्रालय को म्यांमार से आयात करने के लिए पत्र लिखा है। भारत ने निजी कारोबारियों के जरिए 250,000 टन उड़द और 100,000 टन अरहर आयात करने के लिए समझौता किया है। वहीं भारतीय दूतावास (Indian embassy) भी स्थानीय सरकार कारोबारियों से से बातचीत कर रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि अगर म्यांमार से दाल आयात की जाती है तो भरतीय बाजार में कीमतों में गिरावट आ सकती है। बता दें कि कर्नाटक के प्रमुख थोक बाजार कालाबुरागी में 13 मई को दाल की कीमतें बढ़कर 8,729-9142 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गईं। जबकि 21 अप्रैल को इसके दाम 8,165-8,512 रुपये प्रति क्विंटल थे। महाराष्ट्र के अकोला में अरहर की एक्स-मिल थोक कीमतें 5.7 फीसदी बढ़कर 9,000 रुपये प्रति क्विंटल थीं।
म्यांमार में बढ़ रही जमाखोरी
ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए आयातक म्यांमार में उड़द की जमाखोरी कर रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि म्यांमार में उड़द की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद कारोबारी बाजार में उड़द नहीं उतार रहे हैं। म्यांमार में करीब 555,000 टन दालों की जमाखोरी की गई है। इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच उड़द के आयात की गति को साल दर साल 20 फीसदी घटाकर 340,000 टन कर दिया गया है। पिछले कुछ समय से भारतीय मार्केट में स्टॉक में कमी देखने को मिल रही है।