Wheat Export News: सरकार ने दी 25 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट की मंजूरी, घरेलू बाजार पर नहीं होगा फैसला का असर

Wheat Export News: WPPS के अजय गोयल का कहना है कि सरकार ने उम्मीद के मुताबिक फैसला लिया है। खेतों में अच्छी खासी फसल खड़ी है। तुरंत गेहूं के एक्सपोर्ट होने की उम्मीद है। गेहूं से ज्यादा आटे का एक्सपोर्ट होने की उम्मीद है। बल्क एक्सपोर्ट होने की उम्मीद नहीं हैं

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 4:22 PM
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केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट की मंजूरी दी है। DGFT ने नोटिफिकेशन जारी किया।

Wheat Export News: केंद्र सरकार ने 25 लाख टन गेहूं एक्सपोर्ट की मंजूरी दी है। DGFT ने नोटिफिकेशन जारी किया। हालांकि गेहूं की निर्यात नीति अब भी ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में बनी रहेगी, लेकिन तय मात्रा के निर्यात के लिए विशेष छूट प्रदान की गई है। 13 फरवरी को इस फैसले की जानकारी देते हुए खाद्य मंत्रालय ने कहा कि घरेलू बाजार में सप्लाई की स्थिरता सुनिश्चित करते हुए ये कदम किसानों को बेहतर रिटर्न दिलाएगा।

DGFT ने कहा कि गेहूं की निर्यात नीति अभी भी प्रतिबंधित श्रेणी में बनी हुई है, हालांकि 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं के निर्यात की विशेष अनुमति दी गई है। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। साथ ही, गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध जारी रहेगा। हालांकि, अतिरिक्त 5 लाख टन गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है।

खाद्य मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025–26 के दौरान निजी कंपनियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 32 लाख टन अधिक है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम के केंद्रीय पूल में कुल गेहूं उपलब्धता लगभग 182 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि निर्यात की यह अनुमति घरेलू खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को प्रभावित नहीं करेगी।


अब देश में गेहूं के पर्याप्त भंडार, बंपर उत्पादन और घरेलू बाजार में गेहूं की गिरती कीमतों को देखते हुए सरकार ने आंशिक रूप से निर्यात खोलने का फैसला लिया है। लेकिन गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध की नीति को जारी रखा है। यानी गेहूं निर्यात को लेकर सरकार फूंक फूंककर कदम बढ़ा रही है।

रबी 2026 सीजन में गेहूं का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद व्यवस्था के कारण किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है और इस वर्ष भी बंपर उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।

WPPS के अजय गोयल का कहना है कि सरकार ने उम्मीद के मुताबिक फैसला लिया है। खेतों में अच्छी खासी फसल खड़ी है। तुरंत गेहूं के एक्सपोर्ट होने की उम्मीद है। गेहूं से ज्यादा आटे का एक्सपोर्ट होने की उम्मीद है। बल्क एक्सपोर्ट होने की उम्मीद नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के फैसले का असर घरेलू बाजार पर नहीं होगा।

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