गेहूं की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने अहम फैसला लिया है। सरकार ने गेहूं के रिटेलर्स से लेकर बड़े व्यापारियों और प्रोसेस करने वालों के लिए नया नियम का ऐलान किया है जिसके तहत इन सभी को 1 अप्रैल से हर शुक्रवार को अपने गेहूं के स्टॉक की जानकारी देनी होगी। इसके लिए सरकार ने नोटिफिकेशन भी जारी किया है। हर शुक्रवार पोर्टल पर गेहूं का स्टॉक बताना होगा।
दरअसल, कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री ने कहा है कि फूड सिक्योरिटी को बनाए रखने और नुकसान करने वाली अटकलों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने फैसला लिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के थोक और खुदरा कारोबारी, बिग चेन रिटेलर्स और प्रोसेसर्स को अपने गेहूं की स्टॉक पोजीशन दिए गए पोर्टल पर घोषित करनी होगी। ये फैसला 1 अप्रैल से लागू होगा और स्टॉक लिमिट हर शुक्रवार को घोषित की जाएगी।
बता दें कि सरकार ने यह फैसला खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर उठाया है। सरकार के इस फैसले से ना केवल गेहूं पर सट्टेबाजी को रोकने में भी मदद मिलेगी बल्कि कीमते भी काबू में आएगी।
एग्री कमोडिटी एनालिस्ट सुमित गुप्ता का कहना है कि आने वाले दिनों में गेहूं पर स्टॉक लिमिट दोबारा लग सकती है। सरकार को 115 मिलियन टन गेहूं उत्पादन की उम्मीद है। इस साल क्लोजिंग स्टॉक में कुछ नया जुड़ता नहीं दिखता। देश में गेहूं की सालाना खपत 66-70 मिलियन टन रहा। देश की फूड पॉलिसी को कीमत से जोड़ देना गलत है।
RFMFI के प्रेसिडेंट नवनीत चितलांगिया ने कहा कि सरकार ने स्टॉक लिमिट हटाकर इंडस्ट्री को राहत दी है। इंडस्ट्री को स्टॉक बताने में कोई परेशानी नहीं है। 109.46 मिलियन टन गेहूं उत्पादन की उम्मीद है। इस साल गेहूं की कम होने की उम्मीद नहीं है। मंडियों में गेहूं की सप्लाई जारी है। UP, बिहार से भी सप्लाई जल्द शुरू होगी। सप्लाई बढ़ने पर कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।