Edible oil: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से दुनिया भर में खाने के तेल की कीमतें बढ़ रही है। इसकी वजह वेजिटेबल तेलों का बायोडीज़ल प्रोडक्शन की तरफ बढ़ता इस्तेमाल है। ये कहना है कि सनविन ग्रुप के CEO संदीप बाजोरिया। सीएनबीसी-टीवी 18 से बातचीत के दौरान कच्चे तेल में हर $10 की बढ़ोतरी से वेज ऑयल में अपने आप लगभग $50-$70 की बढ़ोतरी हो जाती है।"
बाजोरिया ने बताया कि दुनिया भर में वेजिटेबल ऑयल के प्रोडक्शन का एक बड़ा हिस्सा अब फ्यूल के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने इंडोनेशिया, ब्राज़ील और US जैसे देशों में चल रहे प्रोग्राम्स के बारे में बताते हुए कहा, "दुनिया का 25% वेज ऑयल बायोडीज़ल में जा रहा है, जिससे बायोफ्यूल की डिमांड बढ़ रही है।"
खाने के तेलों का सबसे बड़ा इंपोर्टर होने के नाते, भारत दुनिया भर में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से जुड़ा रहता है। उन्होंने आगे कहा कि देश लगभग 26.5 मिलियन टन की कुल खपत को पूरा करने के लिए हर साल लगभग 16-16.5 मिलियन टन इंपोर्ट करता है।
हालांकि उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों के बावजूद सप्लाई को लेकर कोई चिंता की बात नहीं है। कंज्यूमर के लिए काफी तेल मौजूद है। साथ ही दुनिया भर के शिपिंग रूट्स पर बिना किसी रुकावट के इंपोर्ट जारी है लेकिन, ज़्यादा लागत का बोझ ग्राहकों पर डाला जा रहा है। फ्यूल के उलट, जहां सरकारें असर का कुछ हिस्सा झेल सकती हैं, खाने के तेल की कीमतें सीधे रिटेल मार्केट में दिखती हैं। उन्होंने कहा, "हमें ज़्यादा कीमतों के साथ जीना होगा।"
उन्होंने बढ़ती माल ढुलाई की लागत और घरेलू तिलहन की मजबूत कीमतों को भी ज़्यादा रिटेल कीमतों में योगदान देने वाले दूसरे कारणों के तौर पर बताया। अगले फसल चक्र के साल के आखिर में ही आने की उम्मीद है, इसलिए घरेलू सप्लाई पर दबाव जल्द ही जारी रह सकता है।
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