Wheat Price: देश में गेहूं की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति की कमी और जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण कीमतों में यह उछाल देखने को मिल रहा है। देश में होलसेल गेहूं के दाम 1 महीने में 1 फीसदी बढ़ी है जबकि रिटेल में भी इसमें 1 फीसदी की तेजी आई। देश की मंडियों में गेहूं का हाल पर नजर डालें तो 17 जुलाई को गेहूं का भाव 2,506.66 रुपये प्रति क्विटल था जबकि आवक 51,399.90 मीट्रिक टन पर रही थी। वहीं 18 जुलाई को भाव 2,527.33 रुपये प्रति क्विटल था जबकि 19 जुलाई को 2,447.61 रुपये प्रति क्विटल पर रहा।
इंटरनेशनल मार्केट में बढ़े भाव
इंटरनेशनल मार्केट में गेहूं के दाम चढ़े है। 2 सालों की ऊंचाई के करीब भाव कायम है। शिकागो में भाव $674/बुशेल के ऊपर निकला है। 17 जुलाई को 2 सालों की ऊंचाई पर दाम थे। गेहूं के भाव $682.75/बुशेल तक पहुंचे थे। रेड-सी में तनाव से मिल रहा कीमतों को सपोर्ट मिला।
कीमतों में उछाल का क्या है कारण
रूस-यूक्रेन के बीच जंग अब भी जारी है। रूस, यूक्रेन के पोर्ट इंफ्रा पर हमला कर रहा है। यूक्रेन के हमलों के जवाब में रूस की कार्रवाई की। USDA ने कहा कि 9 जुलाई तक US का एक्सपोर्ट भी गिरा। 2.35 लाख टन गेहूं का एक्सपोर्ट हुआ। ऑस्ट्रेलिया में भी उत्पादन गिरने की आशंका है। पिछले साल से उत्पादन 30% कम रहने की आशंका है। ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन 95 लाख टन रहने का अनुमान है। जबकि 2025 में 1.33 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था । गर्म मौसम के कारण उत्पादन घटने की आशंका है।
श्री गोवर्ध रोलर फ्लोर मिल्स के संदीप बंसल का कहना है कि यूएस में गेहूं की बुआई 100 सालों में सबसे कम है। रूस-यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ने से कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में इस साल गेहूं की उत्पादन कम रहने की आशंका है। ऑस्ट्रेलिया में 25-26 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन संभव है।
भारत में एल नीनो के कारण गेहूं का उत्पादन गिरने की आशंका है। भारत में गेहूं की कीमतों में पॉलिसी के हिसाब से तय होगी। उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्तों में कीमतों का रुख सरकारी नीतियों पर निर्भर होगा। य दि सरकार द्वारा खुले बाजार में गेहूं (OMSS - Open Market Sale Scheme)अगस्त- सितंबर में नहीं आया तो गेहूं की कीमतों में उछाल आएगा।
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