El Nino का खतरा दाल और तेल के रेट बढ़ाएगा? जानिए खरीफ की फसलों को लेकर क्या है तैयारी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अल नीनो को लेकर चिंता करने के बजाय तैयारी करने की जरूरत है. सरकार प्रभावित होने वाले जिलों के लिए एक विशेष आकस्मिक योजना तैयार कर रही है

अपडेटेड May 28, 2026 पर 5:06 PM
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया है कि अल नीनो के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।

क्या अल नीनो (El Nino) का खतरा इस साल आपकी रसोई का बजट बिगाड़ने वाला है? क्या इसके प्रभाव से दाल और खाने वाले तेल के रेट बढ़ सकते हैं? ये तमाम सवाल पॉलिसी मेकर्स और आम लोगों को मथ रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने खरीफ की फसलों को बचाने और इस खतरे से निपटने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया है कि अल नीनो के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने दालों और तिलहन के उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने और एकीकृत कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया है. आइए जानते हैं कि इस साल खरीफ सीजन को लेकर सरकार की क्या तैयारियां हैं और मौसम को लेकर क्या अनुमान जताया गया है.

दिल्ली में 2 दिनों के नेशनल खरीफ कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अल नीनो को लेकर चिंता करने के बजाय तैयारी करने की जरूरत है. सरकार प्रभावित होने वाले जिलों के लिए एक विशेष आकस्मिक योजना तैयार कर रही है और जहां भी जरूरी होगा वहां फसलों में बदलाव पर विचार किया जाएगा.

वैकल्पिक फसलों और बीजों की मैपिंग शुरू


कृषि मंत्री के मुताबिक कृषि मंत्रालय इस समय उन जिलों की पहचान करने की प्रक्रिया में जुटा है जहां अल नीनो का असर पड़ सकता है. इन चिन्हित जिलों में वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वहां जरूरत के अनुसार बीज आसानी से उपलब्ध हों.

क्या है अल नीनो और मौसम विभाग का अनुमान?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल को जारी अपने पहले चरण के पूर्वानुमान में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया था। इसमें दीर्घकालिक औसत (LPA) की लगभग 92 प्रतिशत बारिश होने की बात कही गई है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने मई-जुलाई के दौरान ही अल नीनो की स्थिति लौटने की संभावना जताई है। वहीं अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) ने अपने 11 मई के अपडेट में कहा है कि अल नीनो की स्थितियां मई-जून के दौरान उभर सकती हैं और साल के अंत तक बनी रह सकती हैं।

भारत पर असर

अल नीनो के दौरान पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर (Eastern Tropical Pacific Ocean) की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। भारत में इसे आमतौर पर कम बारिश (सूखे) और अत्यधिक गर्मी से जोड़कर देखा जाता है।

शुरुआती दौर में है खरीफ की बुआई

भारत के कुछ हिस्सों में खरीफ की बुआई अभी बेहद शुरुआती दौर में है। जिन इलाकों में प्री-मानसून की बारिश हुई है वहां किसानों ने खेतों को तैयार कर अगेती बुआई (विशेष रूप से कम अवधि वाली दालें, मोटे अनाज और कुछ कपास) शुरू कर दी है। आमतौर पर खरीफ की सामान्य बुआई जून से शुरू होती है और जून-जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ यह अपने चरम पर पहुंचती है।

दाल और तेल में आत्मनिर्भरता पर जोर

मौसम की इन चुनौतियों के बावजूद कृषि मंत्री ने बताया कि भारत 2025-26 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) में 376.56 मिलियन टन के रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन को हासिल करने की राह पर है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 18.8 मिलियन टन अधिक है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एमएल जाट ने फसल विविधीकरण की वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 के लिए तय चावल उत्पादन के लक्ष्य को पहले ही हासिल कर लिया है। हमें चावल के लिए 50 मिलियन हेक्टेयर जमीन की जरूरत नहीं है बल्कि 2047 तक केवल 35 मिलियन हेक्टेयर ही पर्याप्त होगी। अगर हम बचे हुए 15 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को तिलहन और दालों की खेती की तरफ मोड़ दें तो भारत इन फसलों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकता है।

इन 5 मुद्दों पर सरकार का विशेष फोकस

1- बीज की गुणवत्ता

आईसीएआर के महानिदेशक के मुताबिक किसानों को सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने से ही उत्पादकता में 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके लिए सभी राज्य फार्मों, कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर संस्थानों को बीज उत्पादन को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

2- उर्वरकों का अनियंत्रित इस्तेमाल रोकना

देश के 100 से अधिक जिलों में वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित स्तर से अधिक उर्वरकों का उपयोग पाया गया है। इससे निपटने के लिए पोषक तत्व-कुशल फसल प्रजनन, जैविक और जैविक इनपुट का अधिक उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन पर काम किया जाएगा।

3- एआई और डेटा इकोसिस्टम

भारत विस्तार जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से एआई-संचालित कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत कृषि डेटा इकोसिस्टम बनाने की मांग की गई है।

4- नकली उत्पादों पर सख्त कार्रवाई

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मानसून से पहले बीजों का समय पर वितरण हो, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का दायरा बढ़े, किसान आईडी जारी करने में तेजी आए और नकली बीज, खाद या कीटनाशक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

5- राज्यों की जवाबदेही

शिवराज सिंह चौहान ने टीम एग्रीकल्चर - वन नेशन, One Agriculture, वन टीम के तहत मिलकर काम करने का आह्वान किया और चेतावनी दी कि राज्य स्तर पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर राज्यों के कृषि मंत्री इस तरह के सम्मेलनों से गायब रहेंगे तो वह सीधे मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेंगे।

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