नाम, रुतबा और काम ये तीन शब्द TCS के लिए सटीक बैठते हैं। नाम इसलिए कि ये टाटा ग्रुप का रतन है। देश की सबसे बड़ी कंपनी होने का रुतबा हासिल है और काम ऐसा कि 15 सालों में निवेशकों ने इसमें 1850 फीसदी का रिटर्न कमाए। दुनिया में भी इसने काम से धाक जमाई। दुनिया की टॉप तीन मोस्ट वैल्यूएबल IT कंपनियों में गिनी जाने वाली TCS को हम चैंपियन स्टॉक मानते हैं, क्योंकि ऐसी दूसरी भारतीय कंपनी ढूंढने से भी नहीं मिलेगी तो चलिए IT सेक्टर के इस शहंशाह के 15 साल से शानदार सफर पर नजर डालते है।
25 अगस्त 2004 लिस्ट होने वाली TCS के लिए पिछले 15 सालों का सफर बेहद शानदार रहा है। टाटा समूह के लिए ये कंपनी खजाने से भरी तिजोरी की तरह है। जरा सोचिए, जिस कंपनी में 85 हजार निवेश की वैल्यू 15 साल में 1.75 करोड़ रुपए हो जाए वो किसकी पंसदीदा नहीं होगी।
TCS 25 अगस्त 2004 को लिस्ट हुआ था। इसका आईपीओ 7.7 गुना सब्सक्राइब हुआ था। आईपीओ का रिटेल हिस्सा 3 गुना भरा था। आज मार्केट कैप के लिहाज से ये देश की सबसे बड़ी कंपनी है। TCS के आईपीओ की इश्यू प्राइस 850 रुपये थी। ये शेयर 26.6 फीसदी प्रीमियम के साथ 1076 रुपये पर लिस्ट हुआ था।
लिस्टिंग से अब तक इस शेयर ने 1850 फीसदी रिटर्न दिया है। 2004 में इसमें किया गया 100 शेयरों यानि 85000 का निवेश आज 1.76 करोड़ रुपये हो गया है। इसमें 16.5 लाख का डिविडेंड भी शामिल है। TCS का मार्केट कैप 8 लाख करोड़ करोड़ रुपये है जो निफ्टी में 10 हिस्सेदारी रखता है। TCS पूरे टाटा ग्रुप का रतन है, अकेला ये ग्रुप की सभी कंपनियों पर भारी पड़ता है।
TCS टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनी है। TATA ग्रुप के कुल मार्केट कैप में इसका 75 फीसदी हिस्सा है। वहीं, ग्रुप की कुल आय में इसका 20 फीसदी हिस्सा है। कंपनी के पास 72220 करोड़ का कैश है।
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