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'गौ विज्ञान' एग्जाम में 5 लाख छात्र लेंगे हिस्सा, UGC ने 900 यूनिवर्सिटी को दिया खास निर्देश

परीक्षा संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, पंजाबी, मराठी, कन्नड़, मलयालम, तमिल, मराठी, तेलुगू और उड़िया भाषा में होगी
अपडेटेड Feb 22, 2021 पर 08:57  |  स्रोत : Moneycontrol.com

विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission, UGC) ने देश भर के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से कहा है कि वे गौ विज्ञान (Cow Science) पर होने जा रही राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन परीक्षा में छात्रों को शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें। NDTV के मुताबिक, देशभर के करीब पांच लाख लोग गुरुवार (25 फरवरी) को स्वेच्छा से गौ विज्ञान पर ऑनलाइन परीक्षा में हिस्सा लेंगे। इसके लिए UGC ने देश भर के 900 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र भेजकर कहा है कि वे छात्रों को स्वेच्छा से परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें।


इस परीक्षा का आयोजन राष्ट्रीय कामधेनु आयोग (Rashtriya Kamdhenu Aayog) कर रहा है। UGC के सचिव रजनीश जैन ने कुलपतियों को लिखे पत्र में कहा है कि वे अखिल भारतीय ऑनलाइन कामधेनु गौ-विज्ञान प्रसार-प्रसार परीक्षा (Kamdhenu Gau Vigyan Prachar Prasar Exam) में स्वेच्छा से शामिल होने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करें। कामधेनु गौ विज्ञान प्रचार-प्रसार परीक्षा 25 फरवरी को होगी जिसके लिए कोई रजिस्ट्रेशन फीस नहीं ली जाएगी। इसमें प्राइमरी स्कूलों से लेकर कॉलेजों तक के छात्र भाग ले सकते हैं।


परीक्षा संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, पंजाबी, मराठी, कन्नड़, मलयालम, तमिल, मराठी, तेलुगू और उड़िया भाषा में होगी जिसमें वैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके अलावा आम जनता से भी कोई भी शख्स इस परीक्षा में शामिल हो सकता है। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने पांच जनवरी को एक अधिसूचना में कहा था कि इस परीक्षा को कराने का मकसद सभी भारतीयों के मन में गायों के बारे में जिज्ञासा पैदा करना और उन्हें गायों की क्षमताओं के बारे में बताना है। लोगों को पता होना चाहिए कि गाय अगर दूध देना बंद भी कर दे, तो भी वह व्यवसाय के कितने अवसर दे सकती है।


केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय के तहत 2019 में गठित राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई स्टडी मैटेरियल में बात कही गई है, जैसा बंगाल के भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने कहा था कि भारतीय गायों के कूबड़ में कुछ खास है जो धूप को सोने में बदल देती है और इसी वजह से उनके दूध का रंग पीला होता है। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभाई कठारिया (Vallabhai Kathiria) ने कहा कि इसमें कुछ भी अवैज्ञानिक नहीं है। हम गाय की भारतीय नस्ल के महत्व को जानना चाहते हैं। इसलिए, हम इस परीक्षा को आयोजित कर रहे हैं।


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