नंदा बंधुओं के रास्ते अलग करने से हुआ था एस्कॉर्ट्स ग्रुप को बड़ा नुकसान

कुछ बड़ी गल्तियों और भाइयों के बीच विवाद का खामियाजा एस्कॉर्ट्स ग्रुप को भुगतान पड़ा

अपडेटेड Oct 18, 2021 पर 9:44 PM

विभाजन के बाद देश के प्रमुख कारोबारी घरानों में से एक दिल्ली की नंदा फैमिली थी। 1991 में उदारीकरण के दौर में इस बिजनेस ग्रुप को नए मौकों से बड़ा फायदा मिलने की संभावना थी लेकिन कुछ बड़ी गल्तियों और भाइयों के बीच विवाद के कारण ऐसा नहीं हो सका। एस्कॉर्ट्स की अब वो कारोबारी ताकत नहीं रही जो 1970 और 80 के दशक में थी।

एस्कॉर्ट्स ग्रुप के संस्थापक, हर प्रसाद और युडी नंदा लाहौर से आए थे जहां वे एजेंसी का बिजनेस चलाते थे। इसके बाद हर प्रसाद ने अपनी कंपनी एस्कॉर्ट्स के साथ ट्रैक्टर्स, मोटरसाइकिल और कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की और अगले कुछ दशक में क्वालिटी को लेकर मजबूत साख बनाई।

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एस्कॉर्ट्स की राजदूत मोटरसाइकिल को देश भर में पसंद किया जाता था।

हालांकि, कम इक्विटी हिस्सेदारी से कंपनियों को कंट्रोल करने की कारोबारी घरानों की कोशिश से एस्कॉर्ट्स को नुकसान उठाना पड़ा। 1980 के दशक में इस पर कंट्रोल करने की एक अन्य बड़े कारोबारी ने कोशिश की थी लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण वह सफल नहीं हुए।

हर प्रसाद के दो बेटों राजन और अनिल के बीच एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट की बिक्री को लेकर तनातनी से भी ग्रुप की साख कम हुई थी।



2003 में एस्कॉर्ट्स ने प्राइवेट इक्विटी फंड्स के साथ एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में माइनॉरिटी स्टेक बेचने के लिए बातचीत की थी। इसका ग्रुप के वाइस चेयरमान अनिल नंदा ने विरोध किया। इसके बाद सितंबर 2005 में एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी फोर्टिस हेल्थकेयर को बेचने की डील की गई।

इसके खिलाफ अनिल ने दिल्ली हाई कोर्ट में मामला दायर कर दिया। इस मामले के खिंचने के साथ दोनों भाइयों ने कंपनी का विभाजन कर लिया और अनिल प्रॉफिट में चल रही ऑटोमोबाइल कंपोनेंट कंपनी Goetze के साथ एस्कॉर्ट्स ग्रुप से निकल गए। हालांकि, बाद में उन्होंने इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच दी और रियल एस्टेट और लेदर का बिजनेस शुरू किया।

एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट को आखिर में फोर्टिस ने ही खरीदा। हालांकि, इसके बाद फोर्टिस को भी IHH हेल्थकेयर ने एक्वायर कर लिया था।

कभी देश के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल रहे एस्कॉर्ट्स को निखिल नंदा अब दोबारा मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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