Wadia Realty को झटका, ठाणे में नीलाम हो रही 95 एकड़ जमीन, ये है मामला

वाडिया रियल्टी (Wadia Realty) की ठाणे में करीब 95 एकड़ जमीन नीलाम हो रही है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई में लेंडर्स ने इसे नीलामी के लिए रखा है। जानिए वाडिया रियल्टी की जमीन नीलाम क्यों हो रही है और इसके लिए रिजर्व प्राइस क्या फिक्स किया गया है और इसकी नीलामी किस दिन होनी है

अपडेटेड Jul 20, 2026 पर 12:32 PM
गो फर्स्ट (Go First) की गो एयरलाइंस (Go Airlines) पर बकाए की वसूली के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और आईडीबीआई बैंक जैसे सिक्योर्ड लेंडर्स के ग्रुप की तरफ से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया वाडिया रियल्टी की करीब 95 एकड़ जमीन नीलामी कर रही है। (File Photo)

वाडिया रियल्टी (Wadia Realty) की ठाणे में करीब 95 एकड़ जमीन बिकने वाली है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई में लेंडर्स ने इस जमीन की नीलामी करने का फैसला किया है ताकि गो फर्स्ट (Go First) की गो एयरलाइंस (Go Airlines) के ₹3918 करोड़ से अधिक के बकाए की रिकवरी की जा सके। इस जमीन के लिए बैंकों ने ₹1,375 करोड़ का रिजर्व प्राइस यानी बोली के लिए न्यूनतम भाव तय किया है। नीलामी के नोटिस के मुताबिक वाडिया रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड ने घोड़बंदर रोड पर भयांदरपाड़ा में मौजूद 94.71 एकड़ की प्रॉपर्टी गो फर्स्ट को दिए गए लोन के लिए सिक्योरिटी के तौर पर गिरवी रखा था। अब इसकी नीलामी 20 अगस्त 2026 को होनी है।

Go Airlines पर कितना है बकाया?

गो एयरलाइंस पर बकाए की वसूली के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और आईडीबीआई बैंक जैसे सिक्योर्ड लेंडर्स के ग्रुप की तरफ से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया वाडिया रियल्टी की करीब 95 एकड़ जमीन नीलामी कर रही है। लेंडर्स ₹3,918.55 करोड़ की वसूली करना चाहते हैं। इसमें 31 अगस्त 2023 तक का बकाया मूलधन और ब्याज और साथ ही 1 सितंबर 2023 से लगने वाला अतिरिक्त ब्याज और अन्य शुल्क शामिल हैं।


गो एयरलाइंस पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, दायचे बैंक एजी और आईडीबीआई बैंक जैसे लेंडर्स का ₹6,521 करोड़ बकाया था। इन चार लेंडर्स ने कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) बनाई थी। लगभग दो साल तक चली दिवालियापन की कार्यवाही के बाद भी कोई सही रिजॉल्यूशन एप्लिकेंट नहीं मिलने पर इस कमेटी ने एयरलाइन को लिक्विडेट करने के पक्ष में वोट दिया। वाडिया रियल्टी की कई सर्वे नंबर्स में फैला 94.71 एकड़ जमीन की नीलामी के लिए ₹1,375 करोड़ का रिजर्व प्राइस तय किया गया है, और बोली लगाने वालों को रिजर्व प्राइस का 5% जमा करना होगा।

पहले ही फेल हो चुकी है Go First के आईपीओ की योजना

गो एयरलाइंस (इंडिया) मुंबई के वाडिया ग्रुप की एविएशन कंपनी थी। इसे अप्रैल 2004 में रजिस्टर किया गया था। नवंबर 2005 में इसने गो एयर ब्रांड नाम से सस्ती पैसेंजर एयरलाइन सर्विस शुरू की। करीब तीन साल पहले 2023 में कंपनी ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवालियापन की अर्जी देने के बाद फ्लाइट्स बंद कर दी। एयरलाइन का कहना था कि प्रैट एंड व्हिटनी इंजन की किल्लत के चलते एयरबस ए320 नियो फ्लीट का एक बड़ा हिस्सा ग्राउंड हो गया।

सर्विसेज बंद होने से पहले वाडिया ग्रुप की एयरलाइन ने साल 2021 में ₹3600 करोड़ का आईपीओ लाने की योजना बनाई थी। इसके पैसों का इस्तेमाल कर्ज हल्का करने और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाना था। हालांकि कोरोना महामारी, मार्केट के खराब हालात और बढ़ती वित्तीय दबाव के कारण आईपीओ में बार-बार देरी हुई और आखिरकार एयरलाइन के दिवालिया होने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। जनवरी 2025 में एनसीएलटी ने गो फर्स्ट के लिक्विडेशन का आदेश दिया, क्योंकि लेंडर्स कोई व्यावहारिक रिजॉल्यूशन प्लान नहीं खोज पाए थे। इससे लेंडर्स के लिए सिक्योर्ड एसेट्स से पैसा वसूलने और बकाए पैसे की वसूली का रास्ता साफ हो गया।

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