एडवाइजरी फर्म SES की शेयरहोल्डर्स से अपील, गॉडफ्रे फिलिप्स के बोर्ड में प्रमोटर्स की फिर से नियुक्ति के खिलाफ करें वोट

गॉडफ्रे फिलिप्स की CMD बीना मोदी और उनके बेटे समीर मोदी के बीच बोर्डरूम की लड़ाई के बीच प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म शेयरहोल्डर एंपावरमेंट सर्विसेज (SES) ने शेयरहोल्डर्स को बोर्ड से प्रमोटर ग्रुप के सभी सदस्यों को बाहर करने की सलाह दी है। SES की रिपोर्ट कंपनी की एन्युअल जनरल मीटिंग (AGM) से कुछ दिनों पहले आई है। कंपनी की एन्युअल जनरल मीटिंग 6 सितंबर को होगी

अपडेटेड Aug 28, 2024 पर 3:21 PM
गॉडफ्रे फिलिप्स की CMD बीना मोदी और उनके बेटे समीर मोदी के बीच बोर्डरूम की लड़ाई जारी है।

गॉडफ्रे फिलिप्स की CMD बीना मोदी और उनके बेटे समीर मोदी के बीच बोर्डरूम की लड़ाई के बीच प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म शेयरहोल्डर एंपावरमेंट सर्विसेज (SES) ने शेयरहोल्डर्स को बोर्ड से प्रमोटर ग्रुप के सभी सदस्यों को बाहर करने की सलाह दी है। SES की रिपोर्ट कंपनी की एन्युअल जनरल मीटिंग (AGM) से कुछ दिनों पहले आई है। कंपनी की एन्युअल जनरल मीटिंग 6 सितंबर को होगी।

गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (Godfrey Phillips India) ने शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के लिए 4 सामान्य प्रस्ताव और 2 खास प्रस्ताव तैयार किए हैं। SES ने निवेशकों से बीमा मोदी की फिर से नियुक्ति के खिलाफ वोट देने की सलाह दी है। साथ ही, एडवाइजरी फर्म ने उनकी बेटी चारू मोदी की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति के खिलाफ भी वोट देने की सलाह जारी की है।

SESके मैनेजिंग डायरेक्टर जेएन गुप्ता ने बताया, 'कंपनियों के बोर्डरूम के जरिये लड़ी जाने वाली निजी और पारिवारिक लड़ाइयां संबंधित पक्षों को निवेशकों की नजर में अस्वीकार्य बना देती हैं, क्योंकि ये वही लोग हैं जिनसे कंपनी के बेहतर मैनेजमेंट और मूल्यों की रक्षा की अपेक्षा की जाती है।' एक और प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म इनगवर्न के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीराम सुब्रमण्यम ने बताया, ' परिवार के सदस्यों को बोर्ड से हट जाना चाहिए और कंपनी को प्रोफेशनल बोर्ड और मैनेजमेंट के जरिये स्वतंत्र तरीके से काम करने देना चाहिए। विवाद निपट जाने के बाद परिवार के सदस्य बोर्ड में शामिल हो सकते हैं।'


SES की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बोर्ड के कुल मेहनताने में समीर मोदी और बीना मोदी की हिस्सेदारी तकरीबन 87 पर्सेंट है। इसके अलावा, सिर्फ प्रमोटर-डायरेक्टर समीर और बीना को प्रॉफिट लिंक्ड कमीशन मिलता है, जबकि नॉन-प्रमोटर शरद अग्रवाल को पिछले तीन साल से कोई कमीशन या वैरिएबल पे नहीं मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, ' कंपनी के पास इस तरह की असमानता के लिए कोई वाजिब वजह नहीं है। '

रिपोर्ट में चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद को अलग करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि कंपनी में लोकतंत्र को बनाए रखा जा सके।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।