ऐप के जरिए राइड सर्विस मुहैया कराने वाली कंपनी ओला (OLA) के जनरल काउंसल संदीप चौधरी (Sandeep Chowdhury) ने 9-महीने के कार्यकाल के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस मामले से वाकिफ सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। संदीप चौधरी से पहले ओला के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) गौरव पोरवाल भी कंपनी छोड़ चुके हैं।
चौधरी के बाहर निकलने के हफ्तों बाद मनीकंट्रोल ने बताया कि ओला के मुख्य वित्तीय अधिकारी स्वयं सौरभ और मुख्य परिचालन अधिकारी गौरव पोरवाल ने भी कंपनी छोड़ दी थी। यह तीनों इस्तीफे ऐसे समय में आए हैं, जब ओला अपना आईपीओ लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में इंडस्ट्री के एक्सपर्ट इन इस्तीफों को एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।
इनगवर्न रिसर्च के MD और फाउंडर, श्रीराम सुब्रमण्यम ने बताया, "लिस्टिंग से ठीक पहले कई एग्जिक्यूटिव्स का छोड़कर जाना, किसी भी कंपनी के लिए अच्छा नहीं है। ओला जैसी आक्रामक कंपनी के मामले में यह और भी सवाल खड़ा करती है। इसके अलावा ओला के विभिन्न बिजनेसेज को देखते हुए कई एग्जिक्यूटिव्स का यूं जल्दबाजी में नौकरी छोड़कर जाना एक चेतावनी हो सकता है।"
यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि संदीप चौधरी ने इस्तीफा क्यों दिया या इस्तीफे के बाद आगे की उनकी क्या योजना है? मनीकंट्रोल ने ओला को भी प्रश्न भेजे हैं और जब हमें कोई प्रतिक्रिया मिलेगी तो हम कहानी को अपडेट करेंगे।
संदी चौधरी ने ANI टेक्नोलॉजीज के चीफ जनरल काउंसल के रूप में जॉइन किया था, जो ओला और नुवोको विस्टास कॉर्प की पैरेंट कंपनी है। संदीप की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वह कंपनी के कानूनी, नियामकीय और अनुपालन से जुड़े मामलों को देखते थे और वकीलों की एक टीम का संभालते थे।
संदीप सीनियर मैनेजमेंट और बोर्ड के सदस्यों को आवश्यक सलाह और मार्गदर्शन देते थे, जरूरत पड़ने पर बाहरी काउंसल को मैनेज करते थे। साथ ही वह बड़े, जटिल ट्रांजैक्शन को संभालना, बजट को देखना और आंतरिक टीम की क्षमताओं को विकसित करने जैसी जिम्मेदारियां भी देखते थे।