कर्ज के बोझ तले दबी सरकारी एयरलाइंस कंपनी एयर इंडिया (Air India) को खरीदने के लिए एयरलाइंस के वरिष्ठ कर्मचारियों के साथ अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म Interups Inc ने बोली लगाई है। कंपनी ने कहा कि अगर हम Air India को खरीदने में सफल होते हैं तो इसकी 51% हिस्सेदारी एयरलाइंस के कर्मचारियों की होगी और 49% हिस्सेदारी Interups Inc की होगी। Air India को खरीदने की बोली लगाने के बाद Interups ने कहा, हमने अभी Air India में निवेश करने के लिए 13,500 करोड़ रुपये तैयार रखे हैं। अगर जरूरत पड़ी तो हम भारत के एविएशन सेक्टर में करोडों डॉलर लगाने को तैयार हैं।

आपको बता दें कि अमेरिका के ओवर-द-काउंटर एक्सचेंज (US OTC) में लिस्टेड Interups Inc का m-cap केवल 28 मिलियन डॉलर है, लेकिन कंपनी भारत में दिवालिया हो चुकी कई कंपनियों (bankrupt companies in India) को खरीदने के लिए बोली लगा चुकी है। Interups Inc ने जिन कंपनियों को खरीदने के लिए बोली लगाई, उनमें दिवालिया हो चुकी लवासा कॉर्पोरेशन (Lavasa Corporation), एशियन कलर कोटेड स्टील (Asian Colour Coated Steel) और रिलायंस नेवल (Reliance Naval) जैसी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, Interups Inc के भारत में कोई कंपनी खरीदने में अभी तक सफलता नहीं मिली है।

एयर इंडिया के कर्मचारियों के यूनियन ने बोली लगाई

Interups Inc को उम्मीद है कि वह Air India का अधिग्रहण कर पाएगी। कंपनी के चेयरमैन लक्ष्मी प्रसाद (Laxmi Prasad) ने कहा कि उनके पास अमेरिका और यूरोप में कई NRI इनवेस्टर हैं जो Air India को खरीदने के लिए पैसे देने को तैयार हैं। आपको बता दें कि Interups Inc के साथ Air India को खरीदने की बोली प्रक्रिया का नेतृत्व एयर इंडिया की कॉमर्शियल डायरेक्टर मीनाक्षी मल्लिक कर रही हैं। इस मुहिम से 200 से अधिक कर्मचारी जुड़ चुके हैं। सभी एक-एक लाख रुपए जुटा रहे हैं। एयर इंडिया में कुल 14 हजार कर्मचारी हैं। मुहिम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा तो दो साल में कंपनी ट्रैक पर आ सकती है।

ये कंपनियों भी रेस में

Air India को खरीदने में टाटा ग्रुप के अलावा अडानी और हिंदुजा ग्रुप ने भी दिलचस्पी है। टाटा ग्रुप (Tata Group) ने कर्ज में फंसी सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया (Air India) को खरीदने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (expression of interest) सौंप दिया है। स्पाइसजेट के अजय सिंह (Ajay Singh of SpiceJet) की भी एयर इंडिया पर नजर है, हालांकि कंपनी ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।

बाकी का कर्ज खुद सरकार चुकाएगी

केंद्र सरकार ने इस एयर इंडिया में अपनी 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। इसके साथ ही एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड में भी एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचा जाएगा। एयर इंडिया एसएटीएस एयरपार्ट सविर्सिज प्रा लिमिटेड में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जाएगी। मौजूदा वक्त एयर इंडिया पर 60,074 करोड़ रूपये का कर्ज है, लेकिन अधिग्रहण के बाद खरीदार को 23,286.5 करोड़ रुपये ही चुकाने होंगे। जबकि शेष कर्ज को विशेष उद्देश्य के लिए बनाए गए एयर इंडिया एसेट होल्डिंग्स लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया जाएगा, यानी बाकी का कर्ज खुद सरकार चुकाएगी।

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