मार्केट रेगुलेटर सेबी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही कंपनी के पूर्व CEO रवि नारायण और चित्रा रामकृष्ण पर भी 25-25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना को-लोकेशन (Co-location) मामले में लगा है। आज हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या है को-लोकेशन और NSE ने क्या गड़बड़ी की थी?

क्या है को-लोकेशन और क्यों सेबी ने शुरू की जांच

को-लोकेशन का मतलब है कि ब्रोकरेज हाउस अपने सर्वर एक्सचेंज के अहाते में लगाते हैं ताकि वो NSE के सर्वर से नजदीक रहे। नजदीक रहने के कारण ब्रोकरेज हाउस के सदस्य बहुत तेजी से NSE के सर्वर को एक्सेस कर सकते हैं। इससे उन्हें बाय और सेल ऑर्डर जल्दी-जल्दी प्लेस करने में मदद मिलती है।

कई ब्रोकरेज हाउस हैं जिन्होंने ये को-लोकेशन की सुविधा चुनी हैं। सेबी को 2015 में एक ब्रोकर से शिकायत मिली कि को-लोकेशन फैसेलिटी लेने वाले बाकी लोगों के मुकाबले OPG सिक्योरिटीज को ज्यादा जल्दी डेटा मिल रहे हैं। और यह को-लोकेशन के सिद्धांत के खिलाफ है। को-लोकेशन में डेटा एक्सेस हर सदस्य के लिए पारदर्शी और बराबर होना चाहिए।

इस शिकायत के बाद ही सेबी ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि NSE सभी सदस्यों में बराबरी नहीं रख पाई है। सेबी को यह भी पता चला कि कंपनी के CEO रवि नारायण और चित्रा रामकृ्ष्णा के कार्यकाल में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां हुई हैं और इसके लिए ये दोनों जिम्मेदार हैं।

नारायण 2000 से लेकर 2013 तक NSE के MD और CEO थे। उनके बाद रामकृष्णा ने अप्रैल 2013 से लेकर दिसंबर 2016 तक पद संभाला। इससे पहले वह 2010 से 2013 तक कंपनी की ज्वाइंट MD और 2008 से लेकर 2010 तक डिप्टी MD थीं।

NSE के खिलाफ क्या थी शिकायत?

सेबी को 2015 में एक शिकायत मिली थी जिसमें NSE पर यह आरोप लगाया गया था कि वह Tick by Tick डेटा प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करती है ना कि उसे ब्रॉडकास्ट करती है। Tick by Tick डेटा प्रोटोकॉल में डेटा एक के बाद एक आता है। यानी इसमें किसी एक ब्रोकर के पास डेटा सबसे पहले आएगा और दूसरे के पास उसके बाद। जबकि ब्रॉडकास्ट में डेटा एकसाथ सभी ब्रोकर के पास पहुंचता। ऐसे में जिस ब्रोकर के पास डेटा सबसे पहले पहुंचता था वह कम लोड में सर्वर से कनेक्ट कर लेता था जिसका फायदा उसे दूसरों के मुकाबले जल्दी मिलता था।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि Omnesys Tech को इस Tick by Tick प्रोटोकॉल फीचर की जानकारी थी। इस कंपनी का दूसरा सबसे बड़ा शेयरहोल्डर NSE था। सेबी के पास पहुंची शिकायत के मुताबिक, OPG सिक्योरिटीज ने Omnesys से किसी को नियुक्त कर लिया था। साथ ही NSE डेटासेंटर स्टाफ के साथ भी "कुछ डील" कर ली थी ताकि उसे पता चले कि वह खास सर्वर कब ऑन हो रहा है जिसपर लोड सबसे कम है। इससे दूसरे ब्रोकरेज हाउस के बजाय OPG सिक्योरिटीज को ज्यादा फायदा होता था।

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