सितंबर में लगातार दूसरे महीने कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd.) के प्रोडक्शन में गिरावट देखने को मिली। बारिश की वजह से कोल इंडिया के प्रोडक्शन पर असर देखने को मिला। सितंबर में कंपनी का प्रोडक्शन सालाना आधार पर 1 पर्सेंट की गिरावट के साथ 5.09 करोड़ टन रहा, जबकि पिछले साल सितंबर में यह आंकड़ा 5.14 करोड़ टन था। हालांकि, यह आंकड़ा अगस्त के मुकाबले बेहतर है, जब कंपनी के प्रोडक्शन में 11.9 पर्सेंट की गिरावट हुई थी।
मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में कोल इंडिया का प्रोडक्शन 2.5 पर्सेंट बढ़कर 34.13 करोड़ टन हो गया। यह आंकड़ा पूरे साल के टारगेट 83.8 करोड़ टन के सालाना टारगेट का सिर्फ 40 पर्सेंट के आसपास है। पिछले साल की संबंधित अवधि में आंकड़ा 33.29 करोड़ टन रहा था। मॉनसून सीजन की वजह से आम तौर पर किसी वित्त वर्ष की पहली छमाही में कोल इंडिया का प्रोडक्शन कम रहता है, जबकि दूसरी छमाही में बढ़ोतरी रफ्तार पकड़ती है।
सितंबर में सिर्फ ईस्टर्न कोलफील्ड्स, वेस्टर्न कोलफील्ड्स और महानदी कोलफील्ड्स के प्रोडक्शन में बढ़ोतरी रही, जबकि सेंट्रल, नॉर्दर्न, SECL और BCCL के प्रोडक्शन में पिछले साल के मुकाबले 10 पर्सेंट तक की गिरावट देखने को मिली। सितंबर में कोल इंडिया की बिक्री में भी गिरावट रही और यह 1.4 पर्सेंट घटकर 5.52 करोड़ टन पर पहुंच गया। अगस्त के आखिर में ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने स्टॉक को लेकर 'न्यूट्रल' रेटिंग बरकरार रखी थी और इसके लिए टारगेट प्राइस 567 रुपये तय किया था। ब्रोकरेज फर्म ने निवेशकों को हर तेजी में स्टॉक की बिक्री करने की सलाह दी थी।
ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में कंपनी की वॉल्यूम मैनेजमेंट के टारगेट से कम रह सकती है। कोल इंडिया का शेयर 1 अक्टूबर को 0.3 पर्सेंट की गिरावट के साथ 508.5 रुपये पर बंद हुआ।