कोल मिनिस्ट्री ने 3 कोल माइंस के लिए आवंटन ऑर्डर जारी किया है। कोल मिनिस्ट्री की तरफ से 5 सितंबर को जारी बयान के मुताबिक, इन कोल माइंस से सालाना 2,991.2 करोड़ रुपये का सालाना रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है और इस पर 4,500 करोड़ रुपये का कैपिटल इनवेस्टमेंट होगा। जिन कोल माइंस के लिए आवंटन ऑर्डर जारी किया गया है, उनमें माछकाटा (संशोधित), कुंदानाली लुबरी और सखीगोपाल-बी काकूरही कोल माइंस शामिल हैं। कोल माइंस के सफल बिडर्स में NLC इंडिया लिमिटेड, गुजरात मिनरल डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और तमिलनाडु जेनरेशन एंड डिस्ट्रिब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड शामिल हैं।
मंत्रालय के बयान के मुताबिक, इन 3 कोल माइंस में एक को पूरी तरह से एक्सप्लोर किया गया है, जबकि बाकी दो आंशिक तौर पर एक्सप्लोर किए गए हैं। माछकाटा (संशोधित) कोल माइंस NLC इंडिया लिमिटेड को आवंटित की गई है, जबकि कुंदानाली लुबरी गुजरात मिनरल डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सखीगोपाल-बी काकूरही का आवंटन TANGEDCO को किया गया है।
इन तीनों कोल माइंस की कुल पीक रेटेड कैपिसिटी (PRC) 3 करोड़ टन सालाना है, जिसके लिए ऑर्डर जारी किए गए हैं। मंत्रालय के बयान में बताया कि इन माइंस के पास 219.41 करोड़ टन की भूगर्भीय रिजर्व है। इन कोल माइंस से तकरीबन 40,560 लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
कुछ समय पहले कोल मिनिस्ट्री ने कहा था कि दुनिया की पांच सबसे बड़ी कोयला खदानों में से दो अब भारत में हैं। छत्तीसगढ़ स्थित कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा संचालित ये खदानें गेवरा और कुसमुंडा दुनिया की सबसे बड़ी खदानों में शामिल हैं। एक और खबर के मुताबिक, कोल इंडिया के साथ मिलकर कोल मिनिस्ट्री देशभर में नई कोल वॉशरीज स्थापित करने जा रही है।