Ambuja Cements Q4 : अंबुजा सीमेंट ने 31 मार्च 2024 को खत्म हुई वित्त वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस अवधि में कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 64 फीसदी बढ़कर 1,055 करोड़ रुपए पर रहा है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी का मुनाफा 645 करोड़ रुपए रहा था। कंपनी को चौथी तिमाही में उत्पादन लागत में गिरावट का फायदा मिला है।
31 मार्च 2024 को खत्म हुई चौथी तिमाही में अंबुजा सीमेंट की आय सालाना आधार पर 12 फीसदी बढ़कर 8,894 करोड़ रुपये पर रही है। तिमाही आधार पर देखें तो कंपनी की आय में 9.4 फीसदी की ओर मुनाफे में 28 फीसदी की बढ़त हुए है। तीसरी तिमाही में कंपनी की आय 8,128.80 करोड़ रुपए रही थी, जबकि मुनाफा 823.05 करोड़ रुपये पर रहा था। 30 अप्रैल को अंबुजा सीमेंट्स के शेयर 1.7 फीसदी की गिरावट के साथ 618.95 रुपये पर बंद हुए थे।
स्टैंडअलोन बेसिस पर, सीमेंट निर्माता अंबुजा सीमेंट का मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 502.5 करोड़ रुपये से 4.2 फीसदी बढ़कर 523.3 करोड़ रुपये पर रही है। वहीं, कंपनी की स्टैंडअलोन आय सालाना आधार पर 12.3 फीसदी बढ़कर 4,780.3 करोड़ रुपए पर रही है जो पिछले साल की समान अवधि में 4,256 करोड़ रुपए रही थी।
प्रति शेयर 2 रुपये डिवीडेंड का एलान
31 मार्च 2024 को खत्म हुई चौथी तिमाही में अंबुजा सीमेंट का स्टैंडअलोन एबिटडा सालाना आधार पर 1.2 फीसदी बढ़कर 788 करोड़ रुपए के मुकाबले 797.8 करोड़ रुपए पर रहा है। वहीं, स्टैंडअलोन मार्जिन सालाना आधार पर 18.5 फीसदी से घटकर 16.7 फीसदी पर रहा है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके बोर्ड ने प्रति शेयर 2 रुपये के डिविडेंड की भी सिफारिश की है।
कंपनी ने कहा की चुनाव पूर्व खर्च, बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार के जोर और रियल एस्टेट गतिविधि में निरंतर बनी तेजी के कारण सीमेंट इंडस्ट्री का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति में बढ़त के कारण वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में पूरे भारत में सीमेंट की कीमतों में काफी गिरावट आई। एनालिटिक्स फर्म क्रिसिल की हालिया बाजार रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 में कीमतों में बढ़त के बाद नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक पांच महीनों में कीमतों में 40-45 रुपये प्रति बैग की गिरावट आई है।
इस सेक्टर के टॉप प्लेयरों की आक्रामक क्षमता विस्तार योजनाओं के कारण में अच्छी वॉल्यूम ग्रोथ देखने को मिली है। बढ़ते तापमान, चल रहे आम चुनाव, श्रमिकों की कमी, तरलता की समस्याएं और रेत और पानी की उपलब्धता से संबंधित चुनौतियां जैसे कई कारक हैं जो कुछ रीजन में मांग कमजोर कर रहे हैं।