जून 2023 तिमाही में बीएसई (BSE) की टॉप 500 कंपनियों के नेट प्रॉफिट की ग्रोथ शानदार रही, जबकि रेवेन्यू में ग्रोथ कम रही। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) की रिपोर्ट के मुताबिक, नेट प्रॉफिट में बढ़ोतरी की मुख्य वजह कच्चे माल की कीमतों में गिरावट रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल-जून के दौरान BSE 500 कंपनियों के रेवेन्यू में सालाना 7 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई, जबकि इस दौरान इन कंपनियों के नेट प्रॉफिट में 46 पर्सेंट की तेजी देखने को मिली।
जून तिमाही में इन कंपनियों के कच्चे माल की कीमत में भारी गिरावट रही। इसके अलावा, अन्य इनकम में ग्रोथ से भी कंपनियों का प्रॉफिट बढ़ा। संबंधित अवधि में कंपनियों की अन्य इनकम में 35 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई। हम आपको बता रहे हैं कि वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में भारत की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों के नतीजे कैसे रहे:
. नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों के रेवन्यू में सालाना आधार पर 3 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई, जबकि प्रॉफिट में 42 पर्सेंट की ग्रोथ रही
. कंपनियों के EBITDA (इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की अर्निंग) में पिछले साल की संबंधित अवधि के मुकाबले 25 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई
.जून तिमाही में कंपनियों का मार्जिन बढ़कर 16.4 पर्सेंट हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर सेक्टरों में मार्जिन कोरोना से पहले के स्तर पर पहुंच गया है
.BSE 500 इंडेक्स के कुल रेवेन्यू और प्रॉफिट में टॉप 100 कंपनियों की हिस्सेदारी क्रमशः 67 और 75 पर्सेंट रही।
. जून तिमाही में मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों की अर्निंग में 43 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी हुई
. वित्त वर्ष 2024 में BSE 500 कंपनियों का EPS 1,224 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है और फाइनेंशियल ईयर 2025 में इसके बढ़कर 1,557 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'हमने यह माना है कि तिमाही नतीजों और मैनेजमेंट की टिप्पणियों में अनुमानों को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं पेश किया गया है।
BSE 500 इंडेक्स ने पिछले 6 महीनों में 15.79 पर्सेंट का रिटर्न दिया है।