टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) के CEO और MD सी पी गुरनानी (CP Gurnani) का कहना है कि कंपनी के लिए जून क्वॉर्टर काफी मुश्किल भरा रहा है। उनके मुताबिक, कंपनी के लिए यह तिमाही पिछले 5 साल की सबसे मुश्किल तिमाहियों में से एक है। जून तिमाही में कंपनी की परफॉर्मेंस खराब रही है। टेक महिंद्रा की परफॉर्मेंस में गिरावट ऐसे वक्त में आई है, जब आईटी कंपनियों के लिए कारोबारी माहौल काफी चुनौतीपूर्ण है और इस सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां ग्रोथ गाइडेंस में कटौती कर रही हैं।
जून तिमाही के दौरान, टेक महिंद्रा के आगामी CEO और MD मोहित जोशी को कंपनी के बोर्ड में शामिल कर लिया गया। गुरनानी 19 दिसंबर को रिटायर होने वाले हैं। टेक महिंद्रा के नतीजे हर मोर्चे पर निराशाजनक रहे हैं। रेवेन्यू, प्रॉफिट, EBIT मार्जिन सभी मोर्चों पर कंपनी की परफॉर्मेंस इंडस्ट्री के अनुमान से खराब रही है। सबसे खराब प्रदर्शन कंपनी के कम्युनिकेशंस, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट (CME) सेगमेंट का रहा, जिसकी हिस्सेदारी कंपनी के रेवेन्यू में 40 पर्सेंट है।
गुरनानी ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'CME सेगमेंट के निराशानजक प्रदर्शन की वजह से कंपनी के रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 4 पर्सेंट की गिरावट हुई। कुछ मोर्चों पर गिरावट अनुमान के मुताबिक थी, जबकि बिजनेस माहौल से जुड़ी चुनौतियों और CME सेगमेंट में डील के लंबा खिंचने से कंपनी की परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ा।'
उन्होंने कहा, 'कुछ चुनौतियां तात्कालिक हैं। हम अगली कुछ तिमाहियों में वापसी करेंगी। यह तिमाही पिछले 5 साल की सबसे मुश्किल तिमाहियों में से एक थी। हालांकि, हमें भरोसा है कि अगले कुछ साल में कंपनी फिर से ग्रोथ की रफ्तार पकड़ लेगी। हमारे पास बेहतरीन सर्विस, अच्छी टीम और 1,300 से भी ज्यादा कस्टमर का साथ है।'
गुरनानी का यह भी कहना था कि नए CEO के तौर पर जोशी की नियुक्ति के साथ ही कंपनी रेवेन्यू के लिए CME सेगमेंट पर निर्भरता कम कर BFSI, हेल्थकेयर और बाकी गैर-सीएमई सेगमेंट में डील हासिल करने की कोशिश कर रही है। जोशी लंबे समय तक इंफोसिस (Infosys ) में काम कर चुके हैं और उनके पास BFSI और हेल्थकेयर सेक्टर में 22 वर्षों से भी ज्यादा का अनुभव है। उनका कहना था कि कंपनी मीडियम से लॉन्ग टर्म में इन चुनौतियों से निपट लेगी।