हिंदुस्तान यूनिवीलर (Hindustan Unilever) के साथ विज्ञापनवॉर के पहले राउंड के बाद सीबामेड (Sebamed) एक बार फिर भारत की सबसे बड़ी FMCG कंपनी हिंदुस्तान लीवर के साथ दो-दो हाथ करने के लिए तैयार है। जर्मनी की स्किन केयर (German skincare) प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी सीबामेड (Sebamed) अपने साबुनों की तुलना हिंदुस्तान लीवर के डब और दूसरे नहाने वाले साबुनों से करने की रणनीति से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। अगर देखा जाए तो इस थीम के आधार पर सीबामेड ने अपने नए पेड कंटेंट की शुरुआत भी कर दी है।
मनी कंट्रोल से बातचीत करते हुए सीबामेड के जनरल काउंसिल (General Counsel) और वाइस प्रेसीडेंट (Vice-President), लीगल के संदीप के राठोड़ (Sandeep K Rathod) ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट ऐसे तुलनात्मक विज्ञापनों के पक्ष में है। इनके पीछे वैज्ञानिक तथ्य हैं। उन्होंने आगे कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट की राय है कि इस तरह के तुलानात्मक विज्ञापनों से उपभोक्ताओं को सही जानकारियां मिलेंगी। कोर्ट की राय है कि इस तरह के विज्ञापनों में प्रतिद्वंदी कंपनियों के नाम के नाम का जिक्र करने से कोई नुकसान नहीं है। लेकिन ऐसे विज्ञापनों में नेगेटिव भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। संदीप ने आगे कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए हम Dove is not perfect ना कहकर Sebamed is perfect कहने की रणनीति अपना सकते हैं।
बता दें कि सीबामेड ने 8 जनवरी को एक विज्ञापन अभियान (advertising campaign) शुरू किया था । जिसमें कंपनी के उत्पादों की pH वैल्यू की तुलना HUL के डब, पीयर्स, लक्स और यहां तक रिन डिटर्जेंट बार से की गई थी। इस विज्ञापन के खिलाफ HUL ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में याचिका दाखिल की गई थी।
इस याचिका की सुनवाई करते हुए बॉम्बे HC से सीबामेड को कुछ राहत मिली थी। जिसमें कुछ बदलावों के साथ इन विज्ञापनों को जारी रखने की मंजूरी दे दी गई थी। इस मुद्दे पर आगे बात करते हुए संदीप ने का कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, सीबामेड नहाने वाले साबुन की तुलना कपड़े धोने वाले साबुन से नहीं करता है। इस चीज को ध्यान में रखते हुए सेबमेड अब अपने नए विज्ञापन में HUL के डब जैसे साबुन से कर रहा है। सेबमेड की रणनीति कुछ बदलावों के साथ अपने इस विज्ञपन अभियान को जारी रखने की है।
उन्होंने आगे कहा कि ग्राहकों को pH वैल्यू को लेकर जागरूक करना चाहते हैं। (pH वैल्यू किसी प्रोडक्ट में एसिड की मात्रा बताता है। कम पीएच का मतबल है कि कि किसी साबुन में एसिड की मात्रा कम है।) इस तरह का तुलनात्मक विज्ञापन ग्राहकों के मन में pH वैल्यू के प्रति जागरूकता पैदा करने का सरल तरीका है।
वहीं मनी कंट्रोल ने HUL से बातचीत की कोशिश की। लेकिन उनकी तरफ से मेल पर कोई जवाब नहीं आया है।
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