दिल्ली हाई कोर्ट ने ने जेल में बंद यूनिटेक (Unitech) के डायरेक्टर्स संजय और अजय चंद्रा की उस अर्जी को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने रोज अपने वकील से मुलाकात की अनुमति देने का अनुरोध किया था। हाई कोर्ट ने कहा कि उन्हें अब अलग से कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई जाएगी। जस्टिस विभु बाखरु ने कहा कि बाकी कैदियों की तरह ही उन दोनों को भी हफ्ते में सिर्फ दो बार 30 मिनट के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने वकीलों से मुलाकात करने की अनुमति होगी।

हाई कोर्ट ने 9 जून को अपने आदेश में कहा था, "ऐसी सुविधाएं कैदियों को एक हफ्ते में दो बार दी जाती हैं। लिहाजा अदालत याचिकाकर्ताओं का यह अनुरोध नहीं मान सकता कि उन्हें अपने खिलाफ मामलों में बचाव के लिए वकीलों से रोज  वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात की अनुमति दी जाए।"

कोर्ट के आदेश के मुताबिक,  "मौजूदा हालात में जेल अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं को हफ्ते में दो बार 30-30 मिनट के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा देने का निर्देश दिया जाता है।" कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस दौरान वे सिर्फ अपने वकील से बात करेंगे न कि परिवार और दोस्तों से। परिवार और दोस्तों से बात करने के लिए उन्हें फोन करने की सुविधा दी गई है। चंद्रा के वकील ने कहा कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

दिल्ली पुलिस ने चंद्रा ब्रदर्स को मार्च 2017 में गिरफ्तार किया था। उनपर गुरुग्राम में यूनिटेक के दो हाउसिंग प्रोजेक्ट के जरिए होम बायर्स को ठगने का आरोप है। उसके बाद से ही उन्हें तिहाड़ जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपने एसेट्स बेचकर होम बायर्स का पैसा रिटर्न करने को कहा है।


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