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DHFL Fraud: डीएचएफएल के प्रमोटरों ने कैसे किया 35000 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा बैंक फ्रॉड?

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की अगुवाई में 17 बैंकों के एक कंसोर्शियम ने DHFL को 42,871 करोड़ रुपये का लोन दिया था। यह लोन 2010 -2018 के बीच दिया गया था। DHFL के प्रमोटरों ने इस पैसे का दुरुपयोग किया

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 24, 2022 पर 3:02 PM
DHFL Fraud: डीएचएफएल के प्रमोटरों ने कैसे किया 35000 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा बैंक फ्रॉड?
लोन के पैसे के दुरूपयोग की खबरें मीडिया में आने पर जनवरी 2019 में मामले की जांच शुरू हुई।

CBI ने DHFL के प्रमोटरों कपिल वधावन (Kapil Wadhawan) और धीरज वधावन (Dheeraj Wadhawan) के खिलाफ नया केस दर्ज किया है। उन पर बैंकों से 34,615 करोड़ रुपये का फ्रॉड करने का आरोप है। अमाउंट के लिहाज से यह देश का सबसे बड़ा बैंक फ्रॉड है। यह फ्रॉड कैसे किया गया, इसका मकसद क्या था, इसमें कौन-कौन शामिल था? इन सवालों के जवाब जानने से इस फ्रॉड को समझने में मदद मिलेगी।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की अगुवाई में 17 बैंकों के एक कंसोर्शियम ने DHFL को 42,871 करोड़ रुपये का लोन दिया था। यह लोन 2010 -2018 के बीच दिया गया था। DHFL एक Non-Banking Finance Company थी। एनबीएफसी बिजनेस के लिए बड़े बैंकों से लोन लेती हैं। फिर, उस पूंजी का इस्तेमाल ग्राहकों को छोटे-छोटे लोन देने के लिए करती हैं।

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आरोप है कि डीएचएफएल के प्रमोटरों ने धीरे-धीरे लोन को लौटाना बंद कर दिया। फिर, लोन के पैसे के दुरूपयोग की खबरें मीडिया में आने पर जनवरी 2019 में मामले की जांच शुरू हुई। बैंकों ने 1 फरवरी, 2019 को एक मीटिंग की। इसमें KPMG को DHFL का 'स्पेशनल रिव्यू ऑडिट' करने को कहा गया। KPMG ने 1 अप्रैल, 2015 से 31 दिसंबर, 2018 के लिए ऑडिट शुरू किया।

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