GST Council (जीएसटी काउंसिल) ने शुक्रवार को हुई बैठक में स्विगी और जोमैटो जैसी फूड-डिलिवरी कंपनियों को टैक्स के दायरे में लाने का फैसला किया। बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इन फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म को उनके जरिए दी जाने वाले रेस्टोरेंट सर्विस पर जीएसटी देना होगा। इस टैक्स को ऑर्डर की डिलीवरी के स्थान पर वसूला जाएगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि स्विगी और जोमैटो से डिलिवरी के बिंदु पर 5 पर्सेंट टैक्स वसूला जाएगा। जीएसटी काउंसिल ने यह भी बताया कि यह कोई नया टैक्स नहीं है। अभी तक इस टैक्स का भुगतान रेस्टोरेंट की तरफ से किया जाता था। लेकिन अब रेस्टोरेंसट की जगह इसे जोमैटो और स्विगी जैसी फूड एग्रीगेटर कंपनियों से वसूला जाएगा।

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फिलहाल फूड एग्रीगेटर कंपनिया TCS यानी कि "टैक्स कलेक्टड एट सोर्स" के तौर पर जीएसटी रिकॉर्ड में रजिस्टर हैं। इसका मतलब है कि अभी तक फूड के तैयार होने की जगह यानी रेस्टोरेंट पर टैक्स वसूला जाता है। लेकिन अब इनसे डिलिवरी के बिंदु यानी कि ग्राहक के पास से टैक्स लिया जाएगा।

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जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद रेवेन्यू सेक्रेटरी तरुण बजाज ने कहा कि कोई नया टैक्स नहीं लगा है। बस टैक्स वसूलने की जगह को एक जगह से ट्रांसफर करके दूसरे जगह पर किया गया है।

उन्होंने कहा, "मान लिजिए कि आपने किसी ऐप से खाना मंगाया। अभी इस ऑर्डर पर रेस्टोरेंट आपसे पैसे लेकर टैक्स दे रहा है। लेकिन हमने पाया कि कई रेस्टोरेंट अथॉरिटी को टैक्स नहीं दे रहे थे। ऐसे में अब हमने ये किया है कि आपके खाना ऑर्डर करने फूड एग्रीगेटर ही कंज्यूमर से टैक्स लेकर अथॉरिटी को देगा, न कि रेस्टोरेंट। इस तरह कोई नया टैक्स नहीं लगा है।"

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टैक्स जानकारों का भी कहना है कि इस टैक्स से स्विगी और जोमैटो पर बोझ जरूर बढ़ेगा। लेकिन यह कोई नया टैक्स नहीं है। ऐसे में संभव है कि फूड डिलिवरी ऐप्स ग्राहकों पर बोझ डालने की जगह खुद इसका वहन करें।

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