भारत में अब शराब के सरोगेट विज्ञापन और इससे जुड़े इवेंट्स को स्पॉन्सर करने पर भी पाबंदी लगाने की तैयारी है। इसके लिए नियमों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाएंगे। भारत में शराब के प्रत्यक्ष विज्ञापन पर पहले से पाबंदी है। सरोगेट विज्ञापन पर रोक लगाए जाने से कार्ल्सबर्ग, परनॉड रिकार्ड और डियाजियो जैसी कंपनियों को फिर से अपना मार्केटिंग कैंपेन तैयार करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
इस तरह के 'सरोगेट विज्ञापनों' में अक्सर पानी, म्यूजिक सीडी और अन्य चीजों की आड़ में शराब के लिए 'सरोगेट विज्ञापनों' को दिखाया जाता है। इसमें लोगो और प्रोडक्ट्स से जुड़ी अन्य चीजों का इस्तेमाल किया जाता और अक्सर इसका विज्ञापन बॉलीवुड फिल्म स्टार करते हैं। कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट से जुड़े एक टॉप अधिकारी ने बताया, ' अब शराब और तंबाकू से जुड़ा कोई भी विज्ञापन गुमराह करने वाला पाया जाता है, तो इस वजह से कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है और इसका विज्ञापन करने वाली सेलिब्रिटी पर भी कार्रवाई की जा सकती है। '
अधिकारी निधि खरे ने बताया, 'आप ऐसे प्रोडक्ट्स के प्रचार के लिए घुमावदार रास्ता नहीं चुन सकते।' उन्होंने कहा कि इस संबंध में नए नियम एक महीने के भीतर जारी कर दिए जाएंगे। अगर हम विज्ञापनों को सरोगेट और गुमराह करने वाला पाते हैं, तो विज्ञापन करने वालों मसलन सेलिब्रिटीज को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा।' उदाहरण के तौर पर लीकर कंपनी कार्ल्सबर्ग भारत में अपने टुबोर्ग ड्रिंकिंग वॉटर को प्रमोट करती हैं और विज्ञापन में फिल्मी सितारों को छत पर डांस पार्टी करते हुए दिखाया गया है और इसमें जो स्लोगन इस्तेमाल किया गया है, वह कहीं अन्य इसके बीयर वाले विज्ञापन में भी मौजूद है।
नए नियमों से भारत में शराब कंपनियों को विज्ञापन को लेकर अपनी रणनीति में आमूलचूल बदलाव करना पड़ सकता है। भारत वॉल्यूम के लिहाज से 8वां सबसे बड़ा अल्कोहल मार्केट है और इसका सालाना रेवेन्यू तकरीबन 45 अरब डॉलर है।