कमोडिटी की बढ़ती कीमतों और रुपये के घटते वैल्यू ने दलाल स्ट्रीट में इन्फ्लेशन (महंगाई) की चिंता बढ़ा दी है। निवेशक को इस बात को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं क्योंकि उनको लगता है कि बढ़ती कीमतों का दबाव आरबीआई को अपने लो रेट रुख में बदलाव के लिए मजबूर कर सकता है।
महंगाई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़त को कहते हैं। कमाई में बिना किसी बदलाव के महंगाई में बढ़त क्रय शक्ति को घटा देती है इससे निवेश पर भी असर पड़ता है। शेयर बाजार में महंगाई को निगेटिव फैक्टर माना जाता है क्योंकि इससे इक्विटी से मिलने वाले रिटर्न पर असर पड़ता है।
बता दें कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति के निर्धारण में सीपीआई आधारित महंगाई या दूसरे शब्दों में कहें तो खुदरा महंगाई को की-प्राइस इंडीकेटर के तौर पर उपयोग में लाता है। बता दें कि जनवरी में सीपीआई 4.06 फीसदी के स्तर पर रहा जो उम्मीद से कम था जबकि दिसंबर पर यह 4.59 फीसदी के स्तर पर था।
फरवरी के खुदरा महंगाई दर के आकंड़े 12 मार्च तक आने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि यह 5 फीसदी से नीचे रह सकता है।
क्या महंगाई से बाजार को डरना चाहिए?
निवेशकों को इस बात की चिंता सता रही है कि कमोडिटी की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बढ़त से महंगाई का भूत एक बार फिर सर उठा सकता है। अधिकांश विश्लेषकों की राय है कि इस समय बाजार के लिए महंगाई चिंता का विषय नहीं है।
26 फरवरी को करेंसी और फाइनेंस पर जारी अपने रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा है कि 2 से 6 फीसदी का वर्तमान महंगाई लक्ष्य 5 साल की कीमत स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए सही है। बता दें कि सरकार ने 2016 में 5 अगस्त 2016 से 31 मार्च 2021 तक के लिए 4 फीसदी सीपीआई इन्फलेशन का लक्ष्य निर्धारित किया था।
CapitalVia Global Research की Likhita Chepa का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित 2 से 6 फीसदी का इन्फ्लेशन टॉलरेंस रेट निकट भविष्य के लिए उचित है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय निवेशकों के लिए महंगाई कोई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं होना चाहिए। क्योंकि इस बात की बड़ी सभावनाएं है कि देश में महंगाई निर्धारित टारगेट बैंड के बीच में रहेगी। अगर इसमें थोड़ा बहुत बढ़त होती है तो वह अस्थाई प्रवृत्ति की होगी।
महंगाई के खिलाफ हेज के तौर पर यूज होने वाला गोल्ड अपने सपोर्ट लेवल के आसपास है और इससे महंगाई में किसी असामान्य बढ़त के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए Likhita Chepa का कहना है मीडियम से लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करने वाले लोगों को महंगाई की चिंता ना करते हुए निवेशित बने रहना चाहिए।
ICICI Direct के Pankaj Pandey के लिए अभी इस समय महंगाई चिंता का विषय नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि इन्फ्लेशन बास्केट में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा सबसे ज्यादा होता है। अगर सप्लाई साइड से आनेवाले किसी व्यवधान को छोड़ दें तो खाने-पीने से जुड़ी महंगाई कोई बड़ी समस्या नहीं बनेगी। जहां तक ईंधन की बात है तो यह नकारात्मक छुकाव के साथ रेंज बाउंड रहेगा।
इसी तरह Equinomics Research एंड Advisory के G Chokkalingam का कहना है कि महंगाई में थोड़ी बढ़त से भारतीय बाजार पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। जब तक महंगाई की दर 7 से 8 फीसदी को पार नहीं कर जाती तब तक आपको इसके बारे में चिंतित होने की जरुरत नहीं है।
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