वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में इंफोसिस का मुनाफा 4.5 फीसदी घटकर 3436 करोड़ रुपये हो गया है। वित्त वर्ष 2016 की चौथी तिमाही में इंफोसिस का मुनाफा 3597 करोड़ रुपये रहा था।

वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में इंफोसिस का मुनाफा 4.5 फीसदी घटकर 3436 करोड़ रुपये हो गया है। वित्त वर्ष 2016 की चौथी तिमाही में इंफोसिस का मुनाफा 3597 करोड़ रुपये रहा था।
वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में इंफोसिस की आय 6 फीसदी बढ़कर 17535 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2016 की चौथी तिमाही में इंफोसिस की आय 16550 करोड़ रुपये रही थी।
वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में इंफोसिस की डॉलर आय 2.2 फीसदी बढ़कर 250.1 करोड़ डॉलर पर पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2016 की चौथी तिमाही में इंफोसिस की डॉलर आय 244.6 करोड़ डॉलर रही थी।
तिमाही दर तिमाही आधार पर अप्रैल-जून तिमाही में इंफोसिस का एबिट 4220 करोड़ रुपये से घटकर 4047 करोड़ रुपये रहा है। तिमाही आधार पर अप्रैल-जून तिमाही में इंफोसिस का एबिट मार्जिन 25.5 फीसदी से घटकर 24.12 फीसदी रहा है।
इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2017 का रेवेन्यू गाइडेंस घटा दिया है। इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2017 का रेवेन्यू गाइडेंस 11.5-13.5 फीसदी से घटाकर 10.5-12 फीसदी कर दिया है। हालांकि इंफोसिस ने मध्यम अवधि में 24-26 फीसदी मार्जिन गाइडेंस को बरकरार रखा है।
तिमाही आधार पर पहली तिमाही में इंफोसिस का एट्रिशन रेट 17.3 फीसदी से बढ़कर 21 फीसदी रहा है। तिमाही आधार पर पहली तिमाही में नॉर्थ अमेरिका कारोबार में 2.5 फीसदी की बढ़त रही है। तिमाही आधार पर पहली तिमाही में यूरोप कारोबार में 0.6 फीसदी की बढ़त रही है। स्थिर करेंसी में यूरोप की ग्रोथ 0.3 फीसदी घटी है।
इंफोसिस के सीईओ, विशाल सिक्का का कहना है कि पहली तिमाही नतीजों में रेवेन्यू ग्रोथ से निराशा हुई है, लेकिन नई सर्विसेज के प्रदर्शन से खुश हैं। कंसल्टिंग कारोबार में 1 फीसदी से ज्यादा का नुकसान हुआ है। परफॉर्मेंस बेहतर करने के लिए कदम उठाएंगे। आर्थिक अनिश्चितता के कारण भी कारोबार पर असर पड़ा है, लेकिन ब्रेक्सिट का अब तक असर नहीं हुआ है। ब्रेक्सिट को लेकर सतर्क हैं और असर पर नजर रहेगी।
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