अगर आप अपने लैंड लाइन फोन के नेटवर्क से परेशान हैं, तो नेटवर्क की किचकिच से बचने के लिए सरकार जल्द ही आपको निजात दिलाने की तैयारी कर रही है। सरकार के इस मसौदे के तहत आप मोबाइल नेटवर्क की तरह लैंडलाइन फोन में भी मनचाहा नेटवर्क का चयन कर सकते हैं।
दरअसल दूरसंचार नियामक ने टेलीफोन रेग्युलेटरी अथारिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई को एक मसौदा भेजा है। इसके तहत लैंडलाइन ग्राहकों को भी मोबाइल की तरह अपना नम्बर पोर्ट करने की सुविधा मिलेगी। मामले से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, दूरसंचार नीति 2018 के तहत ही फिक्स्ड लाइन नंबर पोर्टेबिलिटी की योजना तैयार की जा रही है। इससे सरकार की राष्ट्र-एक नंबर योजना को मजबूती मिलेगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह लैंडलाइन नम्बर भी बिना बदले दूसरे नेटवर्क में जुड़ जाएगा। इसके साथ ही अगर ग्राहक कंपनी के नेटवर्क सर्कल से बाहर जाना चाहता है, तो दूसरा नेटवर्क मुहैया कराया जाएगा। अधिकारी के मुताबिक, मोबाइल के मुकाबले फिक्स्ड लाइन पर पोर्टबिलिटी करना कठिन काम है। यौजना तैयर होने क बाद इसे पूरा करने में मे तीन से चार साल लग सकते हैं। पोर्टबिलिटी की सुविधा मिलने से लैंडलाइन कनेक्शंस में इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
10 डिजिट का हो जाएगा लैंड लाइन नंबर
पोर्टबिलिटी लागू होने के बाद लैंडलाइन नंबर भी मोबाइल की तरह 10 डिजिट का हो जाएगा। अभी लैंडलाइन नंबर 7 से 8 डिजिट का होता है। इसे 10 डिजिट का बनाने के लिए एसटीडी कोड भी शामिल कर दिया जाएगा। मोबाइल को पोर्ट होने में जहां 4-5 दिन लगते हैं, वहीं फिक्सड लाइन को पोर्ट होने में इससे ज्यादा समय लग सकता है।
पोर्टबिलिटी से नेटवर्क में सुधार
मोबाइल नम्बर के पोर्टबिलिटी से उपभोक्ताओं को एक बहुत बड़ा हथियार मिल गया। जैसे ही उपभोक्ता के नेटवर्क में खराबी आई, उसके पोर्ट करने का विकल्प मौजूद रहता है। लिहाजा टेलीकॉम कंपनियों में कॉम्पटिशन बढ़ गया। कंपनियों को अपने उपभोक्ताओं के खोने के डर से सुविधा बेहतर हो जाती है। मोबाइल में पोर्ट कराने की सुविधा साल 2010 में शुरु हुई थी।
मोबाइल में पोर्ट करने की सुविधा मिलने से अब तक करोडों मोबाइल ग्राहकों ने अपने नम्बर पोर्ट करा चुके हैं।
फिलहाल देश में तकरीबन 2.16 करोड़ लैंडलाइन कनेक्शन हैं। जबकि मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या तकरीबन 1.16 अरब है।
