Larsen & Toubro क्रूड ऑयल की कीमतें 80-100 डॉलर प्रति बैरल के बीच चाहती है। उसने कहा है कि उसके लिए 'Sweet Spot' होगा। उसने कहा है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए क्रूड ऑयल का यह प्राइस अनुकूल होगा। इससे इंडिया और खाड़ी देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े खर्च पर असर नहीं पड़ेगा।
यूक्रेन-रूस के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड ऑयल की कीमत में आग लगी हुई है। अभी ब्रेंट क्रूड का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल चल रहा है। यह 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। क्रूड की कीमतें बढ़ने की दो वजहें हैं। पहला, यूक्रेन क्राइसिस का असर इसकी सप्लाई पर पड़ा है। दूसरा, कोरोनी की मार से बेहाल दुनिया की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है।
ऑयल इंड्स्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले महीनों में क्रूड के प्राइसेज ऊपर जा सकते हैं। इसकी वजह यह है कि मांग बहुत मजबूत बनी हुई है। इनवेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स के डेसियन कोवरवेलिन ने कहा है कि 2022 की दूसरी छमाही में क्रूड का एवरेज प्राइस 135 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। अगले साल की पहली छमाही में क्रूड का प्राइस 160 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। Trafiguru के चीफ एग्जिक्यूटिव जेरेमी वेयर ने हाल में कहा था कि ऑयल की कीमत जल्द 150 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकती है।
L&T का मानना है कि अभी क्रूड ऑयल की कीमतों का इंडिया में पूंजीगत खर्च की योजनाओं पर असर नहीं पड़ रहा है। उसने कहा है कि उसके मैनेजमेंट का मानना है कि सरकार के पास लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए काफी गुंजाइश है। एलएंडी के करीब 75 फीसदी नए ऑर्डर्स सरकार की तरफ से आते हैं। इनमें केंद्र और राज्यों की सरकारी कंपनियां और मल्टी-लैटरल फंडिंग ऑर्गेनाइजेशंस शामिल हैं। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि ज्यादा फूड और फर्टिलाइजर्स सब्सिडी की वजह से सरकार इस फाइनेंशियल ईयर में पूंजीगत खर्च में कमी करने को मजबूर हो सकती है।
एलएंडटी का मानना है कि क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें से खाड़ी देशों में उसकी ऑर्डर बुक में इजाफा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि ऑयल की कीमतें ज्यादा होने पर खाड़ी देशों की सरकार के पास ज्यादा पैसे आते हैं।