वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में सरकारी बैंकों की परफॉर्मेंस प्राइवेट बैंकों के मुकाबले बेहतर रही। कुल 35 बैंकों की मनीकंट्रोल की एनालिसिस के मुताबिक, मुनाफे और एसेट क्वॉलिटी के मामले में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन प्राइवेट बैंकों पर भारी पड़ा। जुलाई-सितंबर तिमाही में सरकारी बैंकों की नेट प्रॉफिट ग्रोथ 23-51 पर्सेंट के दायरे में रही, जबकि प्राइवेट बैंकों के मुनाफे में ग्रोथ 4-40 पर्सेंट थी।
इसी तरह, नेट नॉन-परफॉर्मिंग आंकड़ों के मामले में भी सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंकों के मुकाबले आगे रहे। सेबी कैटेगरी-1 के मर्चेंट बैंक रीसर्जेंट इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) ज्योति प्रकाश गडिया ने बताया, 'इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में बढ़ोतरी के साथ-साथ पब्लिक सेक्टर के बैंकों के मुनाफे में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। साथ ही, डिपॉजिट कॉस्ट भी नियंत्रण में रही है, क्योंकि सरकारी बैंकों ने दरों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की है।'
जहां तक सरकारी बैंकों का सवाल है, तो पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के नेट प्रॉफिट में 145 पर्सेंट की बढ़ोतरी रही, जबकि यूको बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मुनाफे में 50 पर्सेंट से भी ज्यादा की बढ़ोतरी रही। सितंबर तिमाही में इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ग्रोथ 30 पर्सेंट से ज्यादा रही।
इसी अवधि में यस बैंक के नेट प्रॉफिट में 140 पर्सेंट से ज्यादा की बढ़ोतरी रही। इसके अलावा, IDBI बैंक और जम्मू-कश्मीर बैंक के नेट प्रॉफिट में 38 पर्सेंट से भी ज्यादा की बढ़ोतरी रही। हालांकि, प्राइवेट सेक्टर के कुछ अन्य बैंक मसलन इंडसइंड बैंक, RBL बैंक और IDFC फर्स्ट बैंक के नेट प्रॉफिट में गिरावट रही।
बहरहाल, गडिया का कहना था कि तिमाही आंकड़े कभी-कभी बेस इफेक्ट से प्रभावित होते हैं। किसी तिमाही में एसेट क्वॉलिटी से पूरी परफॉर्मेंस का पता नहीं चलता है।