H-1B वीजा नियमों में बदलाव की चर्चा को लेकर जरा भी चिंतित नहीं हैं TCS के बॉस

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और एमडी के. कृतिवासन का कहना है कि कंपनी एच-1 वीजा (H-1B visas) नियमों में संभावित बदलाव को लेकर अमेरिका में चल रही चर्चा से बिल्कुल भी चिंतित नहीं है। अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने बनने के बाद यह चर्चा तेज हुई है। कृतिवासन ने यह भी कहा कि अमेरिका में आधा से ज्यादा वर्कफोर्स अभी भी स्थानीय है। TCS के रेवेन्यू में अमेरिकी बिजनेस की हिस्सेदारी तकरीबन 50 पर्सेंट है।

अपडेटेड Jan 13, 2025 पर 4:04 PM
दिसंबर 2024 तिमाही में TCS के कुल एंप्लॉयीज की कुल संख्या 6,07,354 थी।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और एमडी के. कृतिवासन का कहना है कि कंपनी एच-1 वीजा (H-1B visas) नियमों में संभावित बदलाव को लेकर अमेरिका में चल रही चर्चा से बिल्कुल भी चिंतित नहीं है। अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने बनने के बाद यह चर्चा तेज हुई है।

कृतिवासन ने यह भी कहा कि अमेरिका में आधा से ज्यादा वर्कफोर्स अभी भी स्थानीय है। TCS के रेवेन्यू में अमेरिकी बिजनेस की हिस्सेदारी तकरीबन 50 पर्सेंट है।

ट्रंप का शपथ ग्रहण 20 जनवरी को होगा। इससे पहले एच-1बी वीजा नियमों में बदलाव को लेकर अटकलों का दौर चल रहा है। कृतिवासन ने कहा, ‘ हम ज्यादा चिंतित नहीं हैं। पिछले कुछ साल में एच1-बी वीजा को लेकर हमारी निर्भरता कम हुई है। अगर आप अमेरिकी वर्कफोर्स की बात करेंगे, तो इसमें 50 पर्सेंट से ज्यादा स्थानीय लोग हैं। अगर एच1-बी वीजा में गिरावट होती है, तो हम बाकी माध्यमों से इसकी भरपाई कर सकते हैं। साथ ही, हम अपना कुछ कामकाज वापस भारत ला सकते हैं। लिहाजा, एच1-बी वीजा पर हमारी निर्भरता काफी ज्यादा नहीं है।’

दिसंबर 2024 तिमाही में TCS के कुल एंप्लॉयीज की कुल संख्या 6,07,354 थी। एच-1बी वीजा नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जो अमेरिका कंपनियों को विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स और आईटी जैसे सेगमेंट में विदेशी स्टाफ को काम करने की इजाजत देता है। स्टाफिंग फर्म टीमलीज डिजिटल के मुताबिक, साल 2024 में अमेरिका ने जितने एच1-बी वीजा को मंजूरी दी, उनमें 20 पर्सेंट हिस्सेदारी TCS, विप्रो, एचसीएल टेक अमेरिका और टेक महिंद्रा (Tech Mahindra ) की थी।


क्लाइंट बजट

कृतिवासन का कहना है कि कस्टमर्स ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन की नीतियों को लेकर बुलिश हैं, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। इससे BFSI, हेल्थकेयर और कंज्यूमर बिजनेस समेत कई सेक्टरों में खर्च बढ़ेगा।

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