Vodafone Idea इस बात के समर्थन में नहीं है कि कंपनी के इक्विटी का इस्तेमाल करके सरकार को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) और स्पेक्ट्रम का बकाया चुकाया जाए। मनीकंट्रोल को यह जानकारी आदित्य बिड़ला ग्रुप से जुड़े सूत्रों से मिली है। सूत्रों ने बताया कि इक्विटी के जरिए बकाया चुकाने का विकल्प "ओनरशिप के उद्देश्य को प्रभावित" करता है।

कंपनी का इरादा इसकी जगह अपने बिजनेस को वापस पटरी पर लाना और उससे हासिल आमदनी के जरिए बकाया चुकाने का है। भारी कर्ज तले दबी वोडाफोन आइडिया सरकार की तरफ से बुधवार को ऐलान किए राहत उपायों का फायदा उठाकर कंपनी के बिजनेस स्ट्रक्चर में बदलाव लाना चाहती है।

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सरकार ने बुधवार को वोडाफोन आइडिया सहित टेलीकॉम सेक्टर की सभी कंपनियों को एजीआर और स्पेक्ट्रम के बकाया की राशि चुकाने के लिए 4 साल की मोहलत देने का ऐलान किया था।

वोडाफोन आइडिया अब अपने घटते मार्केट शेयर को रोकने और वित्तीय सेहत को सुधारने के लिए एक चौतरफा रणनीति पर विचार कर रही है, जिसका लक्ष्य कंपनी के कैश फ्लो को मजूबत करना होगा।

एक सूत्र ने बताया, "राहत सिर्फ सरकार को बकाया चुकाने पर मिली है, न कि टेलीकॉम सेक्टर में जारी गलाकाट प्रतिस्पर्धा से।" उन्होंने बताया कि स्ट्रक्चर बदलावों में मैनेजमेंट में सुधार, प्रतिस्पर्धी कंपनियों पर बढ़त हासिल करना और 2G से 4G नेटवर्क पर अपग्रेड करना शामिल है।

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वोडाफोन आइडिया ने मनीकंट्रोल के ईमेल से भेजे सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया था। बता दें कि वोडाफोन आइडिया 2017 में ब्रिटेन की वोडाफोन ग्रुप और आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी आइडिया सेलुलर के मर्जर के बाद बनी थी।

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