यस बैंक (Yes Bank) 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बैड लोन बेचना चाहता है। वह नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्श कंपनी (NARCL) को अपना बैड लोन बेच सकता है। मामले से जुड़े दो लोगों ने यह खबर दी है। अंग्रेजी बिजनेस न्यूज वेबसाइट मिंट ने यह खबर दी है।

यस बैंक (Yes Bank) 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बैड लोन बेचना चाहता है। वह नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्श कंपनी (NARCL) को अपना बैड लोन बेच सकता है। मामले से जुड़े दो लोगों ने यह खबर दी है। अंग्रेजी बिजनेस न्यूज वेबसाइट मिंट ने यह खबर दी है।
यस बैंक अपनी बैलेंसशीट को साफसुथरा करना चाहता है। दरअसल, बैंक नई पूंजी जुटाना चाहता है। इससे पहले अपनी बैलेंसशीट को ठीक करना चाहता है। उसका टारगेट 31 मार्च से पहले बैड लोन बेचना था। बैड लोन खरीदने वाली अमेरिकी कंपनियों जेसी फ्लवार्स एंड कंपनी और सेरब्रस कैपिटल से भी उसकी बातचीत चल रही है।
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यस बैंक प्राइवेट बैंक है। वह राइट्स इश्यू या क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए फंड जुटाना चाहत है। एक सूत्र ने बताया, "दो फंडों से मिले बिड से यस बैंक का प्रबंधन खुश नहीं है। इसलिए उसने फिर से इस पर विचार करने को कहा है।"
दरअसल, सेरबेरस कैपिटल ने 12000 करोड़ रुपये के एसेट के लिए बोली लगाई थी। इस अमाउंट के बड़े हिस्से को फ्रॉड घोषित किया जा चुका है। इस पैसे की रिकवरी की उम्मीद बहुत कम है। दूसरे सूत्र ने बताया कि बैंक ने फिर से एसेसमेंट करने के बाद पाया है कि वह खुद 5,000 करोड़ रुपये का अमाउंट रिकवर कर सकता है। इसलिए वह इस उलझन में है कि इसे बेचने के लिए बैड एसेट का हिस्सा बनाया जाए या नहीं।
यस बैंक 2018 में डूबने की कगार पर पहुंच गया था। इसके पूर्व प्रमोटर यस राणा पर फ्रॉड का आरोप लगा था। राणा को जेल भी जाना पड़ा था। आरबीआई ने इस बैंक को डूबने से बचाने के लिए रएक प्लान बनाया था। इस प्लान के तहत एसबीआई सहित कुछ बैंकों ने इसमें निवेश किया है।
बैड लोने को बेचने के लिए 15:85 स्ट्रक्चर का इस्तेमाल होगा। इसमें ट्रांजेक्शन की 15 फीसदी वैल्यू अपफ्रंट चुकाई जाएगी, बाकी रकम सिक्योरिटी रिसीट के रूप में होगी। इसका पेमेंट एसेट रिकंस्ट्रक्शन की रिकवरी पर डिपेंड करेगा।
पिछले साल आरबीई ने यस बैंक को एआरसी बिजनेस शुरू करने की इजाजत दी थी। यह नए एआरसी में माइनरिटी इनवेस्टर्स हो सकता था। उसने यह भी कहा था कि प्रस्तावित एआरसी को खरीदार और बिकवाल से दूरी बनाए रखनी होगी।
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