श्रीलंका की 2.2 करोड़ आबादी के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सरकार का विदेशी मुद्रा भंडार करीब खाली हो चुका है। सरकार जरूरी चीजों तक का आयात नहीं कर पा रही है। इससे खानेपीने की चीजों तक की कमी हो गई है। उधर, बढ़ती महंगाई कोढ़ में खाज का काम कर रही है।
श्रीलंका में महंगाई आसमान में पहुंच गई है। सरकार ने शुक्रवार को इनफ्लेशन के आंकड़े जारी किए। नेशनल कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (NCPI) मार्च में बढ़कर 21.5 फीसदी हो गया। एक साल पहले यह सिर्फ 5.1 फीसदी था। फूड इनफ्लेशन 29.5 फीसदी पर पहुंच गया है। आगे ये आंकड़े और बढ़ने की आशंका है।
सरकारी ऑयल कंपनियों ने डीजल की कीमत 64.2 फीसदी तक बढ़ा दी हैं। ट्रांसपोर्टेशन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल डीजल का होता है। महंगे डीजल से लोगों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। फ्यूल की कमी और खानेपीने की चीजों की दिक्कत से लोगों की उम्मीदें टूटने लगी हैं। सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षा की सरकार पर करप्शन के आरोप लग रहे हैं। लोग उन्हें गद्दी से हटाना चाहते हैं।
उधर, श्रीलंका ने आखिरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) से पिछले हफ्ते मदद मांगी है। लेकिन, आईएमएफ ने मदद देने से पहले कड़ी शर्तें रखी है। उसने कहा है कि चाहकर भी 51 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना श्रीलंका के लिए मुमकिन नहीं है। उसने कहा है कि आर्थिक मदद पाने के लिए श्रीलंका को अपने कर्ज की रीस्ट्रक्चर कराना होगा।
आईएमएफ के कंट्री डायरेक्टर मासाहिरो नोजाकी ने बुधवार को कहा, "जब आईएमएफ यह देखता है कि किसी देश के लिए कर्ज चुकाना मुमकिन नहीं है तो उस देश को आर्थिक मदद हासिल करने से पहले कर्ज को रीस्ट्रक्चर कराना पड़ता है।" श्रीलंका की सरकार पहले ही यह कह चुकी है कि वह अपना विदेशी कर्ज नहीं चुका पाएगी।
मंगलवार को सेंट्रल श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि करीब 30 लोग घायल हो गए। पिछले छह हफ्तों में फ्यूल के लिए लंबी लाइन में लगे करीब 8 लाख लोगों की मौत हो चुकी है।