गर्मी बढ़ते ही पाकिस्तान की बेचैनी भी बढ़ती दिख रही है। भारत से आने वाले नदियों के पानी को लेकर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गुहार लगानी पड़ रही है। इसी बीच पाकिस्तान के रावलपिंडी में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही और खराब शहरी योजना की वजह से यह स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है। स्थानीय निवासी लंबे समय से इन समस्याओं को नजरअंदाज किए जाने की शिकायत कर रहे हैं।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मियों में बढ़ती गर्मी और पुरानी हो चुकी पानी सप्लाई व्यवस्था के खराब होने से शहर के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।
पाकिस्तानी सरकार की ओर से लगाए गए कई मोटर, अब या तो जल चुके हैं या ज्यादा दबाव पड़ने से खराब हो गए हैं। ये सभी मोटर 1990 के दशक से इस्तेमाल हो रहे थे। इसके अलावा बार-बार बिजली कटौती और बिना सूचना के होने वाली लोड शेडिंग ने परेशानी को और बढ़ा दिया है। हालात ऐसे हैं कि जो ट्यूबवेल अभी चल रहे हैं, वे भी लगातार पानी सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण हजारों घरों में लोगों को हर दिन लंबे समय तक पानी के बिना रहना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि पिछले कई सालों से चेतावनी दिए जाने के बावजूद प्रशासन ने गर्मियों में बढ़ने वाली पानी की जरूरत को लेकर कोई ठोस तैयारी नहीं की। इसी वजह से अब हालात और ज्यादा खराब हो गए हैं। सादिकाबाद, धोक हस्सू, पीर वधाई और चकलाला जैसे घनी आबादी वाले इलाके इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन इलाकों में रहने वाले लोगों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना पानी के लिए काफी मेहनत करनी पड़ रही है। इस समस्या को लेकर लोगों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
इधर, पानी की बढ़ती कमी का फायदा निजी टैंकर संचालक भी उठा रहे हैं। पानी की मांग बढ़ने के साथ उन्होंने टैंकरों के दाम काफी बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छोटे पानी के टैंकर की कीमत अब करीब 1,500 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि बड़े टैंकर के लिए लोगों को 3,000 से 3,300 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग सस्ते सरकारी टैंकरों से पानी लेना चाहते हैं, उन्हें भी कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद ही उन्हें पानी मिल पा रहा है। कई फिल्ट्रेशन प्लांट बंद होने से लोगों की सेहत को लेकर चिंता और बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन प्लांट्स के बंद होने की वजह से पिछले करीब दो महीनों से लोगों को साफ पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद पंजाब आब-ए-पाक अथॉरिटी इन फिल्ट्रेशन प्लांट्स को दोबारा शुरू नहीं कर पाई है।