वित्तीय संकटों से जूझ रहे टेलिकॉम सेक्टर को सरकार ने बुधवार को बड़ी राहत दी। केंद्रीय कैबिनेट ने एग्रीगेटेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) की बकाया राशि चुकाने के लिए टेलिकॉम कंपनियों को 4 साल का मोरेटोरियम देने का ऐलान किया है। टेलिकॉम सेक्टर की तीन सबसे बड़ी प्राइवेट कंपनियों में से दो कंपनियां इस समय वित्तीय संकटों का सामना कर रही हैं। ऐसे में यह फैसला इन दोनों कंपनियों- भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2019 में एक आदेश में कहा था कि टेलिकॉम कंपनियों को एजीआर के बकाये के रूप में 1,19,200 करोड़ रुपये दूरसंचार विभाग को देने होंगे। इसमें से सबसे ज्यादा 58,254 करोड़ रुपये वोडाफोन आइडिया को चुकाने हैं। जबकि भारती एयरटेल पर करीब 43,980 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया।
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हालांकि सितंबर 2020 में सु्प्रीम कोर्ट ने टेलिकॉम कंपनियों को राहत देते हुए कहा कि वे 10 सालों में किस्तों के रूप में इस बकाया राशि का भुगतान कर सकती हैं। हालांकि दूरसंचार विभाग ने कोर्ट में 20 साल का समयसीमा देने का अनुरोध किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नजरअंदाज कर दिया था।
टेलिकॉम कंपनियों को मोरेटोरियम देने का यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पिछले महीने अरबपति बिजनेसमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने घाटे में चल रही वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया।
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वोडाफोन आइडिया में आदित्या बिड़ला ग्रुप और इंग्लैंड की वोडाफोन ग्रुप की साझेदारी है। वोडाफोन आइडिया ने अभी तक एजीआर के बकाये के रूप में 7,854 करोड़ रुपये सरकार को दिए हैं और उसे अगली किस्त में 9,000 करोड़ रुपये देने हैं, जिसकी समयसीमा मार्च 2020 है।
वहीं इस दौरान भारती एयरटेल ने एजीआर के बकाये के रूप में 18,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है और उसके अगली किस्त में 4,500 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। हालांकि अब मोरेटोरियम के तौर पर इन कंपनियों को 4 साल तक किस्त चुकाने से राहत मिल जाएगी।
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