Delhi Chokes: दिल्ली में 20% बढ़े सांस के मरीज, कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए घातक हो सकती है हवा

Delhi Chokes: दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार 3 दिन तक गंभीर श्रेणी में रहने के बाद सोमवार को थोड़ा सुधार हुआ है

अपडेटेड Nov 08, 2021 पर 8:24 PM

Delhi Chokes: दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण (Air pollution) अब लोगों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। दिवाली (Diwali) और पराली जलाने (Stubble Buring) के मामलों के बाद दिल्ली और आसपास के इलाकों की हवा बेहद खराब हुई है।

डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों (Hospitals) की ओपीडी (OPD) में सांस की परेशानी (Breathing problem)  के मरीजों की संख्या में 20 फीसदी तक का इजाफा हो गया है। इसके अलावा एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि AQI का मौजूदा स्तर उन मरीजों पर गंभीर असर डाल सकता है, जो हाल ही में कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हुए हैं।

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हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए BLK-Max अस्पताल के डॉक्टर डॉक्टर संदीप नायर (Sandeep Nayar) ने कहा कि फेफड़े से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे मरीजों में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ये मरीज बदलते मौसम के कारण बीते 15-20 दिनों में गंभीर लक्षणों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है और अब यह पराली जलाने से हो, गाड़ी के धुएं से हो या पटाखे जलाने से हो,  पिछले कुछ दिनों में मरीजों की संख्या में अतिरिक्त 10 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। 

वहीं इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल (Indraprastha Apollo hospital) के डॉक्टर राजेश चावला (Dr Rajesh Chawla) ने कहा कि दिवाली से सांस संबंधी परेशानियों के मामले बढ़ गए हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि कोरोना वायरस से उबर चुके या अभी भी ICU में भर्ती मरीजों को प्रदूषण की वजह से सांस लेने में मुश्किल हो सकती है।


डॉक्टर चावला ने आगे कहा कि कुछ लोगों में अस्थमा जैसी ब्रोन्कियल हाइपर एक्टिविटी देखने को मिल सकती है। कोविड-19 से उबर चुके करीब 20 से 30 फीसदी मरीज प्रभावित होंगे। यह इस साल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय तक चलेगा। कमजोर फेफड़ों वालों पर प्रदूषण का असर ज्यादा होगा।

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बता दें कि रविवार को AIIMS के डायरक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया (Dr Randeep Guleria) ने भी कहा कि प्रदूषण से आने वाले दिनों में कोविड-19 संक्रमण के और गंभीर मामले सामने आ सकते हैं। प्रदूषण कोविड-19 संक्रमण के गंभीर मामलों का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण सांस संबंधी स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। खासतौर से उन्हें, जिन्हें फेफड़ों की परेशानी है या अस्थमा की समस्या है।

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