ओरिएंटल इंश्योरेंस या यूनाइटेड इंडिया के निजीकरण पर सरकार कर सकती विचार -रिपोर्ट

ओरिएंटल इंश्योरेंस और चेन्नई स्थित यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस दोनों ही अपनी बेहतर फाइनेंशियल स्थिति के कारण प्राइवेट सेक्टर को आकर्षित कर सकते हैं
अपडेटेड Feb 22, 2021 पर 09:37  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सरकार ओरिएंटल इंश्योरेंस (Oriental Insurance) या यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस (the United India Insurance) कंपनी के निजीकरण पर विचार कर सकती है। क्योंकि कैपिटल इन्फ्यूजन (capital infusions) की एक सीरीज के बाद इनकी  फाइनेंशियल स्थिति (financial health) में सुधार देखने को मिला है। इस बात की जानकारी इस मामले से जुड़े सूत्रों से मिली है।


सरकारी जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की फाइनेंशियल स्थिति को और मजबूत करने के लिए सरकार चालू तिमाही (current quarter) के दौरान 3,000 करोड़ रुपये डाल सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ओरिएंटल इंश्योरेंस और चेन्नई की यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस दोनों कंपनियां अपनी बेहतर फाइनेंशियल स्थिति के कारण प्राइवेट सेक्टर को आकर्षित कर सकते हैं।


इस मामले में सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, निजीकरण (privatisation) के लिए एक उपयुक्त (suitable) कंपनी सेलेक्ट करने की प्रक्रिया अभी शुरू हुई है और इसे तय करने में कुछ समय लगेगा। सूत्र न्यू इंडिया इंश्योरेंस के निजीकरण की संभावनाओं से इनकार नहीं कर रहे हैं। यह कंपनी बाजार में लिस्ट हो चुकी है। इसमें सरकारी की हिस्सेदारी 85.44 फीसदी है। प्लान के मुताबिक, नीति आयोग (NITI Aayog) सरकार को निजीकरण (privatisation) को लेकर सुझाव देगा। Department of Investment and Public Asset Management (DIPAM) प्रस्ताव बनाकर इसे आगे बढ़ाएगा।


 फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने अपने 2021-22 में पब्लिक सेक्टर के 2 बैंक और एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी को निजीकरण करने का ऐलान किया था। विनिवेश स्ट्रैटिजी (divestment strategy) के तहत सरकार ने LIC का IPO लाने और 1 अप्रैल से शुरु होने फिस्कल ईयर के  दौरान IDBI बैंक में बकाया हिस्सेदारी बेचने का भी फैसला किया है। केंद्र सरकार ने अगले फिस्कल ईयर में सरकारी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों (financial institutions) की बिक्री से 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय किया है।


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