India-EU Summit: पीएम मोदी ने Covid Vaccine पर पेटेंट हटाने में यूरोपियन यूनियन से मांगी मदद, इन मुद्दों पर भी चर्चा

पीएम मोदी ने कोरोना वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार हटाने में यूरोपियन यूनियन से WTO में भारत और दक्षिण अफ्रीका का सहयोग करने को कहा
अपडेटेड May 09, 2021 पर 17:41  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के देशों के बीच शनिवार को हुए शिखर सम्मेलन (India-EU Summit) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड वैक्सीन पर पेटेंट सुरक्षा हटाने में EU का सहयोग मांगा। शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कोरोना वैक्सीन पर बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) हटाने में यूरोपियन यूनियन से WTO में भारत और दक्षिण अफ्रीका का सहयोग करने को कहा।

पीएम मोदी ने कहा कि कोविड वैक्सीन पर IPR यानी पेटेंट सुरक्षा हट जाने से गरीब देशों को फायदा होगा और दुनियाभर में कोविड से लड़ने में मदद मिलेगी। इसके हट जाने से दुनियाभर की कंपनियां कोविड वैक्सीन का उत्पादन कर सकेंगी, जिससे सभी का भला होगा।

इस शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपियन यूनियन के 27 देशों के बीच करीब 8 साल से अटके फ्री-ट्रेड एग्रामेंट पर भी चर्चा शुरू हुई। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, ग्रीन एनर्जी, 5G टेक्नोलॉजी और आतंकवाद के खात्मे जैसे अहम मुद्दों पर भी भारत की चर्चा EU के नेताओं से हुई। इस शिखर सम्मेलन में पेरिस समझौते को लागू करने पर भी जोर दिया गया।

हालांकि, पीएम मोदी ने प्रमुखता से कोविड वैक्सीन पेटेंट हटाने पर यूरोपियन यूनियन से सहयोग मांगा। इस मुद्दे पर भारत को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है, लेकिन जर्मनी, ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड जैसे EU के देश और जापान के साथ ब्राजील इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में भारत को उम्मीद है कि अमेरिका WTO में उसके और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव के समर्थन में EU देशों को मनाएगा।

इसी के रूस और चीन को मानाने में भी भारत अमेरिकी सहयोग चाहता है जो इस मुद्दे पर अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं। भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा तैयार इस प्रस्ताव में कहा गया है कि दुनियाभर में वैक्सीन की सप्लाई को बढ़ावा देने के लिए कोविड वैक्सीन के पेटेंट को अस्थायी रूप से हटाया (Patent Waiver) जाना चाहिए।

EU के कई अन्य देश जैसे फ्रांस और इटली ने पेटेंट को अस्थायी रूप से हटाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। भारत सहित जो देश कोविड वैक्सीन पर पेटेंट को हटाए जाने के प्रस्ताव के पक्ष में हैं, उनका कहना है कि इससे गरीब देशों में वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ेगी। वहीं, दवा कंपनियों सहित इस प्रस्ताव का विरोध करने वालों की दलील है कि इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा।

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