वित्त मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस के सेकेंड वेव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर मामूली असर पड़ेगा, इंडियन इकोनॉमी पर सेकेंड वेव का असर कोरोना के पहले वेव की तरह नहीं होगा। इसी बीच ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P Global Ratings) ने भी कहा कि भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग अगले 2 वर्ष तक करेंट लेवल पर ही बरकरार रहेगी।
S&P ने शुक्रवार को कहा कि भारत के ग्रोथ रेट में अगले 2 साल में तेज वृद्धि होने की संभावना है, जिससे देश के सॉवरेन रेटिंग को सपोर्ट मिलेगा और इसमें सुधार होगा, लेकिन अभी अगले 2 साल तक यह मैजूदा स्तर पर ही रहेगा। S&P ने मार्च में कहा था कि देश की इकोनॉमी FY22 में 11% की दर से बढ़ेगी, लेकिन कोरोना के सेकेंड वेव के बाद एजेंसी से अब ग्रोथ रेट 9.8% रहने का अनुमान जताया है।
S&P का कहना है कि कोरोना के कारण स्थिति अगर और भयावह होती है तो FY22 में ग्रोथ रेट 8.2% तक लुढ़क सकता है, जिसका पहले 11% की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। एअक वेबिनार को संबोधित करते हुए S&P के ग्लोबल रेटिंग डायरेक्टर एंड्र्यू वूड (Andrew Wood) ने कहा कि कोरोना के सेकेंड वेव का भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकार के फिस्कल पोजीशन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
Andrew Wood ने कहा कि भारत की सॉवरेन रेटिंग BBB- पर स्टेबल है और मुझे अगले 2 साल तक इसमें बदलाव की कोई स्थिति नहीं दिख रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी आशंका जताई कि कोविड के कारण भारत में हालात अगर बेकाबू होते हैं तो इसके असर भारत की सॉवरेन रेटिंग पर पड़ सकता है।
आपको बता दें कि S&P ने पिछले साल भारत की सॉवरेन रेटिंग को लगातार 13वें साल BBB- पर बरकरार रखा था, जो इंवेस्टमेंट के लिहाज से सबसे खराब रेटिंग है। इसी वजह से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए पेश आम बजट में ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों पर भारत के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा था।
एक अन्य रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch Ratings) ने भी पिछले महीने भारत में कोरोना के सेकेंड वेव के कारण कहा था कि इससे भारत की इकोनॉमिक रिकवरी पटरी से उतर सकती है। Fitch ने भी भारत की सॉवरेन रेटिंग को निगेटिव आउटलुक के साथ BBB- पर बरकरार रखा था और उम्मीद जताई थी कि FY22 में देश का इकोनॉमिक ग्रो रेट 12.8 रह सकता है। वहीं, FY23 में 5.8% रह सकता है।
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